चांद नहीं, सूरज बनना है तुझे|
दूसरों के प्रकाश से नहीं
खुद की रोशनी से चमकना है तुझे |
लम्बी लताओं-सी परपोषी नहीं,
दूब-सा स्वपोषी बनना है तुझे|
हजार बार पैरों तले
कुचलने जाने पर भी
दूब-सा सीना तान उठना है तुझे|
पुनः मस्त मगन हो कर लहराना है तुझे |
शाम - सा ढलकर
फिर सुबह के सूरज सा चमकना है तुझे|
दूसरों पर निर्भर नहीं
आत्मनिर्भर बनना है तुझे|
खुद पर उठने वाली उंगलियों को
ताली वाले हाथ में बदलना है तुझे|
कीचड़ में रहकर भी
कमल सा खिलना है तुझे|
फूल बनकर भी
आत्मरक्षा के खातिर
शूल रखना है तुझे|
दूसरों से प्यार करने से पहले
खुद से प्यार करना है तुझे|
खुद का हाथ खुद ही पकड़कर चलना है तुझे|
गैरों से दोस्ती करने से पहले
खुद से दोस्ती करना है तुझे|
उदाहरण देना नहीं
बल्कि खुद का उदाहरण
पेश करना है तुझे|
पद चिन्हों पर चलना नहीं
खुद के पदचिन्ह छोड़ना है तुझे |