बुधवार, 25 अगस्त 2021

महिलाएँ और उनके अधिकार !

तस्वीर गूगल से
कुछ छू रहीं आसमान, 
तो कुछ नहीं कर पा रहीं 
घर की दहलीज भी पार! 
जब भी करती है एक स्त्री
एक महिला के रूप में बात! 
उसके अपने ही बन जाते हैं
उसके राहों की दिवार! 

कभी मां का,कभी बेटी का, 
तो कभी पत्नी आदि रिश्तो का 
हवाला देकर अप्रत्यक्ष रूप से, 
उसके अंदर की नारी को
मारने का करतें हैं प्रयास!
खुद ही करते अपमान,
और खुद ही करते सम्मान की बात! 

बराबरी के अधिकार की लड़ाई में 
महिलाओं की एड़ियाँ घिस रही आज, 
किंतु आरक्षण हर बार 
महिलाओं की काबिलियत पर 
समाज को दे देता है
सवाल उठाने का अधिकार! 
खुद ही करते भेदभाव 
और खुद ही करते समानता की बात! 

जब भी एक स्त्री 
एक महिला के रूप में 
आवाज उठाती है ! 
तो इस समाज को वो
फूटी आंख भी नहीं भाती है! 

जो स्त्री मां, बेटी ,और बहू 
बनते बनते नारी बनना भूल जाती है ! 
वही स्त्री इस समाज को भाती है! 
उसी को संस्कारी होने की
उपाधि दी जाती है! 

मंगलवार, 17 अगस्त 2021

विज्ञान की दो धारी तलवार है खतरनाक!

तस्वीर गूगल से
एक दिन एक खुला आसमान 
धूमिल- सा , बेरंग, बेनूर 
और उदास हो जाएगा!! 
कोई पंछी उड़ता हुआ, 
नजर नहीं आएगा!! 
ना ही बादलों का रंग 
असंख्य मूर्तियां बनाएगा!! 
रात में तारों की मौजूदगी का
कोई निशान नहीं रह जाएगा!! 
ना हवाओं में शोर होगा, 
और समंदर भी ठहर जाएगा!! 
सूर्योदय से पूर्व 
उषा की चुनरी का 
चंपई अलोक नहीं रह जाएगा!! 
आसमान की छाती में  सुराख़ कर, 
देवदार नहीं भूल पाएगा!! 
आसमान की सांस लेने की 
कोई आहट ना होगी!! 
पहाड़ों की  नोक में 
चमकती बर्फ की परत ना होगी!! 
बर्फ की आहों का घुट-घुटा धुआं
भी नजर नहीं आएगा!! 
सूर्य की किरणों के चुभन से
सी-सी करती धरती का
स्वर हमेशा के लिए दब जाएगा!! 
विज्ञान की दो धारी तलवार के
एक गलत वार से 
मनुष्य एक दिन खुद को ही 
कभी न भरने वाला घाव दे जाएगा!! 
एक धमाके की आवाज के साथ 
 सन्नाटा पसर जाएगा!!

शनिवार, 14 अगस्त 2021

सच्ची देश भक्ति मेरी नज़र में

भले ही हमारे समाज के लोग 
बालश्रम, बाल विवाह 
और कन्या भ्रूण हत्या करते हैं , 
पर देश से प्यार बहुत करते हैं!! 
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भले ही बिजली-पानी का 
दुरूपयोग करते हैं,
कूड़ा रास्ते में फेकते है, 
देश की सम्पत्ति को नुकसान पहुचाते ,
पर देश से प्यार बहुत करते है!! 
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भले ही हमारे सरकारी कर्मचारी, 
घूस लेकर
जो काम जमीन पर नही हुआ, 
उसे कागज पर कर देते हैं! 
भले ही गरीबों पर 
कुत्ते की तरह भौकते है,  
और अमीरों के सामने 
कुत्ते की तरह दुम हिलाते है! 
उन्हें चुपके-चुपके सारे कानून को 
टोड़ने की इजाजत दे रखते हैं! 
पर देश से प्यार बहुत करते हैं!! 
    ◦•●◉✿✿◉●•◦
भले ही हमारे राजनेता 
देश को लूटते रहते हैं, 
रेप और हत्या पर राजनीति करते हैं! 
और स्वतंत्रता दिवस पर
तिरंगे के नीचे ही सफेद झूठ बोलते है, 
पर देश से प्यार बेहिसाब करते हैं!! 
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भले ही हमारे युवा 
यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं!  
जातिवाद, धर्मवाद के नाम पर दंगे करते हैं
पर देश से प्यार बहुत करते हैं! 
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भले ही हमारे पत्रकार 
देश के जरूरी मुद्दों पर को नहीं उठाते हैं  
और टीआरपी के लिए हद से नीचे गिर जाते हैं
पर  देश से प्यार बहुत करते हैं!!
     ◦•●◉✿✿◉●•◦
वो क्या है कि 
हमारे यहाँ कुछ लोग 
देशवासियों से नहीं 
सिर्फ देश शब्द से प्यार करते  हैं! 
और ऐसी देशभक्ति को हम सलाम करते हैं!! 
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क्या कोई बता सकता है कि अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन किए बिना देश की जनता से प्यार किए बिना, हम देश से प्यार कर सकते हैं? हम एक सच्चे देशभक्त बन सकते हैं? क्या हम भारतीय कानून का पालन किए बिना सच्चे देश भक्त बन सकते हैं?मेरी नजर में तो सच्चा देशभक्त वह है जो अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी निर्वहन करता है! अर्थात एक जिम्मेदार नागरिक सच्चा देशभक्त होता है। सच कहूंं तो मैं भी अभी तक पूर्ण रूप से जिम्मेदार नागरिक नहीं बन पाई हूँ क्योंकि कभी-कभी निजी स्वार्थ के खातिर समाज और देश केे प्रति जिम्मेदारियों को न चाहते हुुए भी अनदेखा करना पड़ता हैै ! लेकिन फिर भी पूरी कोशिश कर रहीं हूँ एक जिम्मेदार नागरिक बनने की! आसान तो नहीं हैै नामुमकिन भी नहीं है! मेरे बारे में 👆यह जान कर हो सकता है कि कुछ लोगों के मन आ रहा हो कि पहले अपने गिरेबान में झाँक लेना चाहिए, फिर किसी पर उंगली उठानी चाहिए! तो साफ कर देना चाहती हूँ कि मैं किसी पर उंगली नहीं उठा रही बस इतना चाहतीं हूँ कि सब लोग देश भक्त बनने से पहले एक अच्छे नागरिक बने! 

गुरुवार, 5 अगस्त 2021

मानवता की हदें पार करने वाले के लिए मानवता की बात क्यों?

तस्वीर गूगल से

बेटियाँ  कैसे सुरक्षित रहेगी जब तुमने अपने लाडलों  को घटिया हरकत करने की छूट दे रखी है?और बेटियों के पढ़ाई और बाहर जाने पर भी पाबंदी लगा रखी है ! महिलाएँ असुरक्षित है ,ये तो सब कहते है पर खतरा किससे है, ये बताने कि हिम्मत किसी में नही है ! तुम्हारे लाडलो और तुम्हारी वजह से लड़कियों पढ़ाई अधुरी रह जाती है ,सपने अधुरें रह जाते है , खुल के जीने का हक छीन लिया जाता है । और तुम खुद पर शर्म करने बजाय खुद के मर्द होने पर गर्व करते हो! कभी ये सोचा है कितनी लड़कियों के सपने सिर्फ तुम्हारी वजह से अधूरें रह जाते हैं? 
ऐसे ही चुप बैठे रहे तो एक दिन अफसोस करोगे मर्द होने पर !ये सच है कि सभी पुरुष बलात्कारी नहीं होते ,पर सभी बलात्कारी पुरुष ही होते है!  
उन सभी अच्छे लोगो को आवाज बुलंद करने की जरूरत है जो चरित्रवान और बहुत ही अच्छे व्यक्तित्व के है! क्योंकि एक मछली के सड़ने से पूरे तालाब का पानी दूषित हो जाता है! और अगर दूषित होने से बचाना है तो समय रहते उसे तालाब से फेकना ही पड़ेगा! 
किसी लड़की को तब उतना डर नहीं लगता जब रात के अंधेरे में सूनसान सड़क पर अकेले होती है जितना डर दो-चार अजनबी लड़कों के होने पर लगता है । फिर चाहे वे अच्छे ही हो पर पता थोड़ी होता है ,अगर कुछ पता होता है तो सिर्फ इतना कि ये उस पुरुष जाति के लोग है जिसमें हैवान भी रहते हैं । इंसान और हैवान बाहर से एक जैसे ही दिखते है! अंतर कर पाना बहुत ही मुश्किल होता है! इसलिए अगर कोई लड़की किसी अच्छे व्यक्ति को भी गलत समझती है तो ये उसकी गलती नही है! बल्कि कुछ पुरुष रूपी हैवानो की देन है! 
क्या तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं है, कि अपने पुरुष जाति के मनचलों के खिलाफ आवाज उठाने की और उनसे सारे रिश्ते नाते तोड़ने की ?महिलाओं के लिए न सही पर अपने जाति को बदनाम होने से बचाने के लिए तो कोई कदम उठाओ! अब आप भले तो जग भला वाली नीति से काम नहीं चलेगा।अपने साथ दूसरों को भी भला बनाना पड़ेगा! अगर पुरुष जाति पर रेपिस्ट का ठप्पा लगवाने से बचाना चाहते हो तो ? 
ये जो मनचले होते हैं, ये अपने घर की लड़कियों के बहुत अच्छे वाले भाई होतें हैं! वहीं बाहर दूसरी लड़कियों के लिए कसाई होते हैं ! ये अपने घर की बेटियों का सुरक्षा कवच होता है वही दूसरी लड़कियों के सुरक्षा कवच का कारण होतें है ! ऐसे लोगों को उनके ही घर की बेटियाँ को  इस बात का एहसास कराना चाहिए कि वे उनके साथ असुरक्षित महसूस करती है! जब इनके अपने इनकी भावनाओं को चोट पहुचाएंगे! तब इन मनचलों को कुछ फर्क पड़ेगा!
जो लोग बलात्कार की वजह छोटे कपड़े बताते हैं
और कहते है कि लड़कियाँ छोटे कपड़े पहनती तो लड़को का मनमचल जाता है और उनमें यौन इच्छा उत्पन्न हो उठती है जो उन पर हावी हो जाती है और बलात्कार का रूप धारण कर लेतीं हैं! तो उनसे पूछना चाहती हूँ , कि गाँव की लड़कियाँ तो छोटे कपड़े नहीं पहनती फिर उनके साथ ऐसी दरिंदगी क्यों होती है? 
और 5-6 साल की बच्ची के साथ भी क्यों? क्या छोटी बच्चियों को देख कर भी इनका मन मचल जाता है? अगर इनका अपनी इंद्रियों पर इतना ही काबू नहीं है तो इनके पुरुष होने की पहचान को ही खत्म कर देना चाहिए! अगर अंग प्रदशन से बलात्कार होते है तो फिर एक अधजली महिला के साथ क्यो दरिंदगी होती है ? मुझे आज भी उस महिला की बात याद जो 2019 में  मैने अखबार में पढ़ी थी! जिसमें वो अपने जलने पर दुखी होने की जगह खुश थी,क्योंकि उसे लगता था कि उसके बदसूरत होने के बाद उसके साथ फिर कभी दरिंदगी नहीं होगी पर वो गलत थी! इसके बाद भी उसके साथ कई बार बलात्कार होता रहा और आखिर में एक दिन वो मौत से हार गयी! किसे खूबसूरत दिखना पसंद नहीं है पर वो अपने बदसूरत होने पर खुश हो रही थी !  
सोचिये जरा किन हालातों में वो ऐसी बातें कर रहीं थी! 
हम उसके दर्द का अनुमान भी नहीं लगा सकते कि वो किस दर्द से गुजर रही थी!
वहीं पिछले साल गाजियाबाद के पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या सरेआम बीच बाजार में उनकी दो नन्ही- नन्ही बेटियों के सामने सिर्फ इसलिए कर दी गयी क्योंकि उसने अपने भांजी को छेड़ने वाले मनचलो के खिलाफ केस कर दिया था ! सोचिए जरा ऐसा होने के बाद वो बेटियाँ जिनके पिता की हत्या उनके आँखो के सामने कर दी गई हो, वे कभी किसी मनचलो के खिलाफ आवाज उठा पायेंगी?और वो बेटी जिसके मामा की हत्या उसके लिए आवाज उठाने पर कर दी गयी हो ? उस लड़की के साथ आज क्या हो रहा होगा कितने तानो और तिरस्कार  भरी नजरो का सामना करना पड़ रहा होगा! क्योंकि
उसके मामा की हत्या का जिम्मेदार उसे ठहराने से कोई चूक नहीं रहा होगा! 
कोई ये कहने से नहीं चूक रहा होगा कि सिर्फ छेड़ा ही तो था क्या जरूरत थी घर के गार्जियन को बताने की ? क्या हुआ इससे उल्टा जान चली गयी!  अरे! रास्ता बदल लेती कान बंद कर लेती, तो जान बच जाती । लड़के तो होते ही है कुत्ते भौकने देते ।और ऐसा कहने वाली अधिकतर महिलाएँ ही होती है!  सोचिए इतना कुछ होने के बाद वो लड़की कभी किसी के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत कर पायेगी ?और जितनी भी लड़कियों ने खबर देखी , पढ़ी होगी वे किसी मनचलों के खिलाफ आवाज उठाना चाहेगीं? अपने परिवार वालों की जान दाव पर लगना चाहेगीं? 
मुझे समझ में नहीं आता कि विक्रम जोशी के हत्यारों को अब तक मौत की सज़ा क्यों नहीं मिली? जबकि घटना के वक्त उनकी दो बेटियों  मौजूद थी और वारदात सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हैं फिर किस सबूत की कमी है? और तो और ऐसे गुनाहगारों को बेल क्यों दी जाती है? क्या इसलिए कि बाहर जाकर पीड़ित परिवार पर दबाव बनाये उन्हें डराएं धमकायें? क्यों नहीं ऐसी सज़ा का प्रावधान करते हैं कि जिससे लोगों के मन में डर बने और ऐसी हरकत करने के बारे में सोचने से भी डरें? क्यों मानवता की हदें पार करने वाले के लिए मानवता की बात की जाती है? और हमारे समाज के लोग जो गौहत्या करने वाले को समाज से अलग कर देते हैं और उसे भीख मांग कर पेट भरने के लिए मजबूर कर देते हैं! उससे सारे रिश्ते नाते तोड़ देते हैं, तो फिर एक हैवान के साथ ऐसा क्यों नहीं करते? 
राजनेताओं की तो मुझे बात ही नहीं करनी है क्योंकि लाशों पर राजनीति करना तो उनकी परंपरा है? वैसे भी शिकायतें उनकी की जाती है जिनसे कुछ अच्छे की उम्मीद हो! और राजनेताओं से सिर्फ यही उम्मीद की जा सकती है! 
नोट- इस लेख में उन पुरुषों की आलोचना की गयी है जो हमेशा लड़कियों को हिदायतें देते रहते हैं और लड़कों की गलतियों पर पर्दा डालते रहते हैं! 
 

राष्ट्र चिंतक मतलब भगत सिंह

  आप हमेशा मेरे❤रहेगें!आप से मेरी हिम्मत है!  किसी भी राष्ट्र का निर्माण एक माँ से आरंभ होता है , क्योंकि किसी भी राष्ट्र का अभि...