𝓗𝓮𝓪𝓻𝓽 ❤ 𝓣𝓸𝓾𝓬𝓱𝓲𝓷𝓰 𝓜𝓸𝓶𝓮𝓷𝓽 😭
उढ़ा देतीं हैं कुछ तस्वीरें नींद रातों की मेरी
जब याद आता है वो मंज़र छलक आती है
आंखें मेरी|
खिलौने और मैदान के झूले को निहारती लालचभरी निगाहें|
कैसे वो बच्चा मन मार कर रह जाता है.
स्कूल के बस्ते को उठाने की उम्र में वो जिम्मेदारियों का बोझ उठाता है|
जिद करने की उम्र में वो जरुरतें पूरी करता है|
हम ब्रांडेड जूते चप्पल पहनते है
वो नगें पैर मीलों चलता रहता है|
हम महलों में रहते हैं
और वो चारदीवारी को तरसता है|
उसका पूरा दिन कूड़े के ढेर में गुजरता है
पर किसी का दिल उसके लिए नहीं पसीजता है|
उसका बचपन हर रोज जोरो से रोता है,
पर किसी को सुनाई नहीं देता है.
जुबां होने पर भी वे जुबा बन कर सब सहता है|
ऐसी तस्वीरें देख धूमिल जी की ये पंक्ति मेरे जेेेहन में आ जाती है_
"गरीबी एक खुुुली हुई किताब ,
जो हर समझदार और मुर्ख के हाथ में दे दी गई है|
कुछ उसे पढ़ते हैं,
कुछ उसके चित्र देख
उलट -पुलट कर रख देते
नीचे 'शो- केस' के |"