शुक्रवार, 5 मार्च 2021

कलयुगी रावण

आईना ना हमें दिखाओ, अपनी अश्लील नज़रों का जा कर शुद्धीकरण  कराओ! 
 खुद के घर की लड़कियों का सुरक्षा कवच बनते हैं
और दूसरे के घर की लड़कियों के सुरक्षा कवच कारण! 

अनगिनत चहरे छुपा के रखते हैं ये कलयुगी रावण

अश्लील अंदाज में राम का नाम लेकर

 लड़कियों को छेड़ते हैं, 

मर्यादा की सारी हदें पार करते हैं, 

और खुद को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र का सच्चा भक्त बोलते हैं! 

खुद करते हैं, काली करतूत

और महिलाओं को चेहरा ढकने पर करते हैं मजबूर! 

खुद के घर की बेटियों के सिर से चुन्नी पल भर के लिए नहीं उतरने देते हैं, 

और दूसरों की  बहन और बेटियों को, 

अपनी गंदी नजरों से निवस्त्र कर  देते हैं! 

लड़कियों को देख कर, 

यौन का इन पर इस तरह चढ़ता है भूत

कि इनका खुद पर नहीं रहता नियंत्रण 

और कर बैठते हैं काली करतूत! 

है निवेदन,मेरी इनकी माँ और बहनों से

कि इनसे रहे हमेशा दूर! 

क्या पता कब इन पर  चढ़ जाये यौन का भूत, 

और ये कर बैठे अपने ही लोगों के साथ काली करतू़त! 

 मत करो अपमान जानवरों का, इन लोगों की तुलना करके जानवरों से! 

क्योंकि जानवर ,जानवर वाला  ही कार्य करता है, 

लेकिन ये मानव रूपी दानव..........?  



52 टिप्‍पणियां:

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  2. Wow! Wonderful.👏✋✋✋✋
    Karara tamacha hai ghatiya soch and gandi nazar walo ke muh par

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (07-03-2021) को    "किरचें मन की"  (चर्चा अंक- 3998)     पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --  
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  4. इंसान जब हैवान हो जाता है फिर कभी इंसान नहीं बन पाता, तब वह केवल स्वांग भरता है इंसान का
    और ये सही कहा आपने जानवरों से इनकी तुलना उनका अपमान है

    वर्तमान परिदृश्य में बहुत सटीक,

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  5. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 06 मार्च 2021 को साझा की गई है........."सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  6. ज्वलंत विचारों वाली उम्दा रचना 🌹🙏🌹

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  7. मन के आक्रोश को बेबाकी से कह डाला है ।बेहतरीन

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  8. वाह बहुत ही सुन्दर यथार्थ को दर्षाती रचना।

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  9. आज के परिदृश्य का यथार्थपूर्ण चित्रण..

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  10. सार्थक और निर्भीक सृजन।

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  12. बहुत खूब ! आईना दिखाती बेबाक रचना

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  13. आप बहुत निर्भीक हैं और बेलाग कहती हैं । हमारे पाखंडी समाज के लिए आईना है आपकी यह पोस्ट । मेरी यही दुआ है कि आपकी क़लम को और ताक़त मिले और आपकी हिम्म्त सदा बरक़रार रहे ।

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    1. आप लोगों का प्यार और स्नेह ऐसे ही मिलता रहा तो मेरी हिम्मत ऐसे ही बरकरार रहेगी! आप लोगो के प्यार और स्नेह से मेरी हिम्मत है! आपका बहुत बहुत धन्यवाद और आभार सर 🙏🙏

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  14. ज्वलंत विचार आईना दिखाती बेबाक रचना

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  15. सार्थक, सपाट और सटीक! बधाई और आभार!!!

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  16. सही कहा...कलयुगी रावणों से बचने की जरूरत है....

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  17. प्रिय मनीषा, आपके लेखन का आक्रामक तेवर बहुत बडी खूबी है आपकी। औरतों और लड़कियों के प्रति समाज का व्यवहार हमेशा से ही दोहरेपन का रहा है। अपनी बेटियों जैसी भावना यदि सब की बेटियों के बारे में हो तो समाज से अनैतिक आचरण का नामोंनिशान मिट जाए। आज दृष्टि नहीं दृष्टिकोण बदलना होगा तभी समाज में सुधार संभव है। खरे भाव हैं आपकी रचना में।पर आपको लेखन का अभी सतत अभ्यास करना है। गद्य के साथ पद्य में भी। एक छात्रा के रूप में आपका लेखन बहुत बेहतर है। और निरंतर अभ्यास से इसमें अपने आप और सुधार आता चला जायेगा। यूँ ही आगे बढती जाओ , मेरी हार्दिक शुभकामनाएं और स्नेह ❤❤🌹🌹

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  18. और एक बात और तुम्हें ब्लॉग पर आने के लिए आग्रह की आवश्यकता बिल्कुल नहीं। मैं खुद आ जाया करूँगी। पीछे बहुत व्यस्ताएं रही सो आने में देर हुई। ठीक है! ❤❤

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    1. वो क्या है मैम ,आप उन लोगों में से हो जिनकी प्रतिक्रिया ना मिलने पर अधूरा अधूरा सा लगता है!इस लिए.......!और मैम चाहती हूँ कि कोई भी मेरी सिर्फ तारीफ ही न करें मेरी कमियाँ भी बताएं जिससे मैं सुधार कर सकूँ!आपको तहेदिल से धन्यवाद🙏💕🙏💕🙏💕🙏💕

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  19. बहुत अच्छी पोस्ट ।आप यशस्वी हों

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  20. सार्थक लेखन...
    बहुत शुभकामनाएं !

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  21. बहुत बढ़िया। बढ़िया लेखन के लिए खूब पढ़ना जरूरी है। चरैवेति!!!

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  22. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

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  23. इन "मानव रूपी दानव" से खुद की रक्षा करना सिर्फ और सिर्फ हमारा दायित्व बन गया है। उन माँ को समझना पड़ेगा कि -जैसे हम बेटियों के लिए कायदे-कानून बनाते है वैसे ही बेटे पर भी पवंदियाँ लगानी जरूरी है। तभी इन दानवों का अंत होगा। खुद को इन दानवों से बचाये रखना बेटा,किसी और से बचाने की उम्मींद नहीं रखना। आक्रोश से भरा बेहतरीन लेखन ,ढेर सारा स्नेह आपको।

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद और आभार 🙏🙏🙏🙏🙏
      बस ऐसे ही अपना प्यार और स्नेह बनाये रखिएगा 🙏🙏🙏

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