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गुरुवार, जनवरी 27, 2022

सोच का नया नजरिया

चित्र गूगल साभार
निती अभी कक्षा आठ में पढ़ती, है अपनी माँ करुणा की तरह समाजसेवी बनने का और वृद्धाश्रम खोलने का सपना है।आज उसका मूड बहुत ही ऑफ है स्कूल से आते ही उसने एकतरफ बैग पटक कर कपड़े चेंज करके, बिना कुछ कहे झन में छत पर चली गई और बालकनी में पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी।हर रोज की तरह आज उसने मम्मी को भी नही पूछा और न ही किचन में खाने की तलाश में गयी।गुमसुम सी बैठी सामने आ जा रहे लोगों को देख रहीं थी।तभी उसकी मम्मी की आवाज आयी। निती! तू टिफन बॉक्स वैसे ही वापस क्यों ले आई कुछ खाया क्यों नहीं?देख तेरी आदते दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, पक्का तूने बाहर की चीजें खाई होगी। मैं तुम्हें कितनी बार समझा चुकी हूं कि बाहर की चीजें हमारे सेहत के लिए अच्छी नहीं होती है।पर निती, करुणा के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया और वहीं चुपचाप बैठी रही। करुणा दोबारा वहीं सीढ़ियों से आवाज लगाती है "अच्छा कोई बात नहीं आगे से ख्याल रखना!" अब चल नीचे आजा कुछ खा ले भूख लगी होगी तुझे! पर इस बार भी निती कुछ नहीं कहती और वहीं चुपचाप बैठी रही। जब कुछ देर तक निती नीचे कुछ देर तक नीचे नहीं आयी, तो फिर करुणा सोचने लगी  कि शायद दोस्तों के साथ लड़ाई हुई होगी इसलिए  मूड ऑफ है। सो नीचे नहीं आ रही है! 
ओह!
ऊपर से मैंने भी डांट दिया, चलो मनाते हैं किसी तरह।निती को मनाने के लिए करुणा सीढ़ियों से ही आवाज़ लगाने लगी, निती बेटा चलो जल्दी-जल्दी कुछ खा लो फिर तुम्हें अपने वृद्धाश्रम में आए नये मेहमानों से मिलाती हूं तुम्हें उनसे बातें करना कितना पसंद है ना ,और तुम्हें अपने दोस्तों के साथ खेलने भी तो जाना है। "मुझे किसी के साथ नहीं खेलना और ना ही किसी से मिलना है।" कहते हुए निती का गलाभर आया। अब तक करुणा बालकनी पर आ गयी होती है, निती की आंखों में आंसू देख करुणा परेशान हो गयी, मम्मी को देख कर निती रो पड़ी और करुणा की सीने से चिपक गयी!अब करुणा और भी ज्यादा परेशान हो गयी।"क्या हुआ मेरे बच्चे तू रो क्यों रही है किसी ने कुछ कहा क्या ? 
रो मत! 
तू बता मुझे! मैं तेरे साथ हूं! तुझे कुछ नहीं होगा तेरी मम्मा है ना तेरे साथ, सब ठीक कर देगी तू बता तो सही। 
निती रोते हुए कहती है मम्मी आप कहती हो कि बाहर की चीजें हमारे सेहत के लिए ठीक नहीं होती है जितनी घर की ठीक होती है।
 "हां तो सही तो कहती हूं!"
तो फिर लोग अपने वृद्ध मां बाप को वृद्धाश्रम क्यों भेज देते हैं ?बाहर के लोग भी तो उतने अच्छे नहीं होते उनके लिए, जितने अपने अच्छे होते हैं। जितनी अपनों की प्यार से उन्हें खुशी मिलती है उतनी खुशी बाहर के लोगों के प्यार से तो नहीं मिलती। जब कोई पराया प्यार करता है व परवाह करता है तब-तब सोचते हैं कि काश ये प्यार मुझे मेरे अपनो से मिलता! मम्मी पता है आपको, मेरे दोस्त के दादाजी को वृद्धाश्रम भेज दिया आज उसके मम्मी पापा ने ,उसके दादा इतने अच्छे हंसमुख और प्यार बांटने वाले थे , खुशियों का पिटारा होता था उनके पास। जो भी उनके पास जाता था मुस्कुराते हुए वापस आता था। फिर भी उन्हें वृद्धाश्रम भेज दिया। दादा जी से मैं जब भी बात करती थी टाइम का पता ही नहीं चलता था, मैं हमेशा सोचती थी कि मैं उनको भी अपने यहाँ बुला लूं लेकिन आज जब वह हमारे पास आ रहे थे तब मुझे खुशी नहीं हुई जब उनकी आंखों में आंसू देखा तब मैंने तय कर लिया कि मैं कभी भी आपकी तरह नहीं बनूंंगी, मैं कभी भी वृद्धाश्रम नहीं खोलूंगी बल्कि मैं किसी भी मां-बाप को उसके दो बेटे से अलग नहीं होने दुंगी।मैं ऐसा काम करूंगी कि लोग अपने मां बाप को वृद्धाश्रम भेजने के बारे में सोचें भी ना, मैं लोगों की नजरिया बदलने का काम करूंगी! लोगों को जागरूक करूंगी।लोगों के मन में अपने मां-बाप के लिए प्रेम का पौधा लगाऊंगी और खुद ही सींचुंगी कि हमेशा हरा भरा रहे और जिससे मैं अपने समाज को वृद्धाश्रम मुक्त बना सकूं। यह सब सुन कर करुणा की आंखों में खुशियों के आंसू छलक आए। करुणा ने कहा हां बिल्कुल! तुम मेरी तरह मत बनना तुम मुझसे एक कदम हमेशा आगे ही रहना।करुुणा को अपनी बेटी की नई सोच पर नाज हो रहा था। 

सोमवार, दिसंबर 06, 2021

नि:शब्द


उस बस्ती में रोज की तरह आज भी चूल्हे से उठता धुआं बगल में लगे कूड़े के डेर से उठती असहनीय बदबू वहीं पास में खेल रहे बच्चे और बगल में बह रहा गंदा नाला बस्ती से सटी गगनचुंबी बिल्डिंग्स जिसमें हजारों लोग रहते हैं जिसमें जाने के लिए चमचमाती सड़कें हैं, जिस पर अनेकों लोग आ जा रहे हैं! पर एकदम शांति है सिर्फ मोटर कार की आवाज ही आ रही है और वहीं बस्ती में शाम के वक्त कुछ ज्यादा ही चहल पहल है भेड़, बकरियों की आवाज बच्चे के रोने की आवाज आदि आ रही है! बस्ती में जाने के लिए कच्ची सड़कें हैं जिस पर शाम के वक्त कुछ ज्यादा ही धूल उड़ रही है! यह दृश्य अमीर और गरीब के बीच की असमानता को साफ साफ दर्शाता है ! अमीर और गरीब के बीच की खाई दूर से ही देखकर महसूस की जा सकती है! कच्ची सड़कों पर कुछ बच्चे एक साथ कूड़े से मिले जरूरी सामान को बोरी में भरकर पीठ पर लादे आपस में जोड़ घटाव करते हुए आ रहें हैं, कुछ खुश तो कुछ उदास दिख रहें हैं ! तभी बगल से एक लंबी सी चमचमाती कार, धूल उड़ाते हुए सामने निकलती है कार को देखकर सभी बच्चे कार के पीछे दौड़ पड़े यह सोच कर कि कोई सोशल वर्कर उनके लिए कुछ लेकर आया है! कार बस्ती के बीचो बीच जाकर रुकी, कार के रुकते ही आसपास के सभी बच्चे कार को घेर कर खड़े हो गए तभी कार का दरवाजा खुला, जिसमें से घुंघराले बालों, अच्छी कद काठी वाला व्यक्ति निकला। जिसकी उम्र लगभग 50-55 की होगी। उसके हाथ में एक मोटी सी डायरी और कलम है , और आंखों पर गोल फ्रेम का ऐनक पहन रखा है। यह व्यक्ति एक मशहूर लेखक है, पर बच्चों के लिए अजनबी। सभी बच्चे बड़ी उत्सुकता से उसकी तरफ देख रहे हैं लेखक बच्चों की तरफ देखता है और उनके पास जाता है खड़े-खड़े ही उनसे कुछ देर बात करता है और अपनी डायरी में कुछ लिखता है! फिर पास की झोपड़ी में चूल्हे पर खाना पका रही महिला के पास जाता है और लेखक वही बगल में पड़ी खाट पर बैठते हुए कहता है कि 'चूल्हे के धुए से आपको बहुत तकलीफ होती होगी ,मैं समझ सकता हूं'  सभी बच्चे लेखक को घेर कर खड़े हो जाते हैं! लेखक वहीं बैठे वृद्ध व्यक्ति से बातें करने लगता है और अपने बारे में बताता है उन्हें बताता है कि वह उनकी गरीबी पर एक किताब लिखने के लिए आया है! इतना सुनकर वृद्ध व्यक्ति के लबों पर एक अजीब सी मुस्कान तैर जाती है! वृद्ध व्यक्ति मुसकुराते हुए कहता है आपसे पहले भी बहुत लोग आ चुके हैं हमारी गरीबी को कोरे कागज़ पर उतारने के लिए..! खैर, आपकी किताब के लिए जितनी मदद कर सकता हूँ वो करूँगा! लेखक साहब बातें करते करते अपनी डायरी पर कुछ पॉइंट लिख भी रहे हैं! तभी एक 15-16 साल का दुबला पतला सा लड़का बच्चों के बीच से बाहर आकर लेखक सेे बोलता है अंकल क्या मैं कुछ पूछ सकता हूं? लेखक कहता है हाँ, हाँ क्यों नहीं बिल्कुल!मैं आप लोगों से बातें करने और आप लोगों के बारे में जानने ही तो आया हूं ,बेझिझक पूछो जो पूछना है! 
अंकल हमारी बेबसी को कैमरे में कैद करके बहुतों की जिंदगी चमक जाती है तो फिर हमारी जिंदगी बेरंग ही क्यों रहती है? जब लोग हमारी गरीबी को मात्र कोरे कागज  पर उतार कर अमीर और फेमस हो जाते हैं तो हम गरीब क्यों रह जातें हैं? मतलब जिसकी वजह से बहुत से लोग अमीर हो जाते हैं वो गरीब क्यों रहता है? यह सवाल सुनकर लेखक निशब्द हो जाता है और उसकी कलम वहीं की वहीं रुक जाती है.....! मानो उसके शब्दकोश में शब्द ही नहीं रह गए! 

गुरुवार, दिसंबर 02, 2021

सबसे बड़ी सज़ा

अरू आज शॉपिंग से वापस आने के बाद पहले जैसे खुश नहीं थी और ना ही उछलते हुए सभी को अपने कपड़े,सैंडल आदि दिखाने गई! आते ही उसने कमरे में पड़ी टेबल पर शॉपिंग के बैग को रख दिया और कमरे में पड़ी बेड पर तकिए में मुंह छुपा कर लेट गई! तभी वहां उसका भाई नील आया और बोला 'ओए! तुझे क्या हुआ? तू ऐसे लेटी क्यों है? कपड़े नहीं दिखाने सभी  को? ' अरू बोली 'नहीं कुछ नहीं ,बस थक गई हूं मूड नहीं है! इस पर नील अरू को चिढ़ाते हुए बोला अच्छा ! इससे पहले तो कभी नहीं थकती थी! शॉपिंग जाने से पहले तो ऐसे ही चहक रही थी जैसे पहली बार फ्लाइट में बैठने जा रही है! और अब जब सारी शॉपिंग हो गई फिर मुंह क्यों लटका है?'नहीं भाई कुछ नहीं हुआ है! पर तू मेरे रूम में बिना नॉक किए मत आया कर! और हां! जब मैं अकेली रहूं तो तुम मुझसे बात करने रूम में मत आया कर ,अगर कोई काम हो तो बाहर बुला लिया कर!' अरू का यह रूप देखकर नील एकदम हैरान था! उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है? बोला अरू तू ऐसे क्यों बात कर रही है? मैं तेरा भाई हूं और वह भी सगा! शॉपिंग में कोई चीज की कमी रहेगी जो तू मुझ से नाराज है? देख कल तेरा बर्थडे है और मुझे तेरी यह शक्ल बिल्कुल भी पसंद नहीं मुझे  तेरी स्माइल देखनी है! 'हो गया तुम्हारा, तो अब जाओ यहाँ से! मुझे कुछ देर अच्छा महसूस कर लेने दे ! प्लीज! ये सुनकर नील बहुत दुखी होता है और उदास होकर वहां से चला जाता है! रात के 12:00 बजते ही नील अरु के रूम में बर्थडे विश करने आता है और जैसे ही बर्थडे विश करता है, अरू उस चिल्ला पड़ती है, तुम इतने असभ्य कैसे हो सकते हो ?रात के 12:00 बजे एक लड़की के रूम में.......! तुम ऐसी हरकत करने से पहले ये क्यों नहीं सोचते कि सामने वाला क्या महसूस कर रहा है वह तुम्हारे साथ सहज महसूस करता है या नहीं? यह सुनकर नील बोला पर तू तो रात में डरने पर मेरे पास आ जाती थी,क्योंकि तू मेरे पास खुद को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करती थी फिर ऐसा क्या हुआ जो तू ऐसी बातें कर रही है? तेरी सोच इतनी घटिया कैसे हो गई? छी...!मैं देख रहा हूं कल मार्केट से आने के बाद से तू मेरे साथ ऐसे विहैव कर रही है जैसे मैं तेरा भाई नहीं बल्कि कोई अजनबी हूँ! 'मेरी सोच घटिया नहीं बल्कि तुम घटिया इंसान हो !' और क्या कहा सुरक्षित महसूस करती थी मैं तुम्हारे साथ, हां करती थी पर कल मॉल में तेरा जो रूप देखा उसके बाद बिल्कुल भी सुरक्षित महसूस नहीं करती हूं! डर लगता है मुझे तेरे साथ! आश्चर्य से नील बोला! कौन -सा रूप?  अरू बोली 'तुम्हें सच में नहीं मालूम...? कल उस लड़की को गंदी नजर से देखने वाले तुम नहीं थे तुम्हारा भूत था क्या? इतना सुनते ही नील के चेहरे का रंग उड़ गया! अरू आगे बोलती है तुम गंदी नजर से उस लड़की को देख रहे थे पर तुम्हारी नजरें चुभ मुझे रही थी, असहज मैं महसूस कर रही थी, तुम्हारी नजरें निवस्त्र उस लड़की को कर रही थी पर निवस्त्र मैं भी हो रही थी! और तुम्हारा चरित्र भी मेरे सामने निवस्त्र हो रहा था! तुम मेरे रक्षक और बाकियों के लिए भक्षक क्यों हो? भाई ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि जितना सुरक्षित और सहज मैं तेरे साथ महसूस करती हूं उतना बाकी लड़कियां भी करें? अगर कोई लड़का दूसरी लड़कियों के लिए भक्षक ना बने तो उसे अपनी बहन का रक्षक बनने की जरूरत ही ना पड़े! मुझे हंसते हुए देखना चाहते हो, मुझे तोहफा देना चाहते हो ना ?तो तुम मुझे अपनी ये बुराइयां दे दो तोहफे में! मैं इस साल कैंडल नहीं बल्कि तुम्हारी इस बुराई को जलाना चाहती हूं! दे सकते हो...? अरू का नील के साथ असुरक्षित महसूस करना नील के लिए सबसे बड़ी सज़ा थी! नील पत्थर की मूरत सा खड़ा जमीन को देखे जा रहा था और उसकी आंखों से अश्रुधारा बह रही थी! उसके आंसुओं के साथ उसकी बुराइयां भी बह रही थी! अपने आंसुओं से अपनी गुनाहों का  प्रायश्चित कर रहा था! 

नारी सशक्तिकरण के लिए पितृसत्तात्मक समाज का दोहरापन

एक तरफ तो पुरुष समाज महिलाओं के अधिकारों और उनके सम्मान की बात करता है और वहीं दूसरी तरफ उनके रास्ते में खुद ही एक जगह काम करता है। जब समाज ...