गुरुवार, दिसंबर 30, 2021

ईश्वर ,अल्लाह और गॉड?

Manisha Goswami कहते हैं इस पूरे श्रृष्टि का निर्माण सर्वशक्तिमान ईश्वर ने किया है , तो हर इंसान का निर्माण भी उन्हीं ने किया है
तो जाहिर सी बात है मनुष्यों के अंदर होने वाली सारी गतिविधियां भी उन्हीं की देन है, तो फिर किसी की खतरनाक सोच और हैवानियत भी उनकी देन हैं. तो फिर कोई इंसान बुरा होता है तो हम उसे गलत क्यों   कहते हैं? क्योंकि उसकी खतरनाक सोच भगवान की देन है.और भगवान की कोई चीज गलत नहीं हो सकती.
कहते हैं भगवान की मर्जी के  बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता  तो फिर हत्या, हैवानियत, चोरी आदि भी उनकी मर्जी से होतें होगें? इससे उनका मनोरंजन होता होगा? तभी तो चुप चाप एक देखते रहते हैं, या फिर जिसे सब सर्वशक्तिशाली कहते हैं उसकी हकीकत कुछ और है?या तो वो सर्वशक्तिशाली नहीं  है? या तो अति निर्दयी है?और जब कोई गलत काम करता है तो ये भी भगवान की मर्जी से होता है तो फिर दोषी को सजा सुुुना  कर सुप्रीम कोर्ट भगवान के खिलाफ काम करती है. क्योंकि इंसान तो भगवान की कठपुतली है जो उनके इसरो पर नाचता रहता है. दोषी नेे उन्हीं के इसारे पर काम किया , तो फिर किसी की नजरों में वो गलत कैसे हो गया? कहते हैं भगवान के सारे काम सही  होतें हैं तो दोषी भी सही और सुप्रीम कोर्ट भी.जब दोनों सही है तो फिर सजा क््यों? क्योंकि ये भगवान ने उससे करवाये हैं तो असली गुनेहगार तो भगवान है.और हाँ भगवान, अल्लाह  और गॉड  शक्तिशाली हैं तो फिर इन मंदिर और मस्जिदों की रखवाली ये मामुली इंसान क्यों करता है?  क्या भगवान इतने आलसी हैं कि अपने घर की रक्षा खुद नही कर सकते? 
उस समय  भगवान , अल्लाह और गॉड कहाँ चले जाते हैं? जब कोई ढोगी उनके नाम से लोगों को लूट रहा होता है और उनके ही दरबार में किसी के जिस्म से अपनी प्यास बुझाता है. क्या इतने बेशर्म और निर्दयी होतें हैं भगवान? तो फिर इनकी पूजा क्यों करते हैं लोग?
 
कहाँ चले जाते हैं  प्रेमियों के मार्गदर्शक सांवरिया कृष्ण उस वक्त जब कोई व्यक्ति प्यार के नाम पर किसी मासूम के जिस्म को अपना निसाना बना रहा होता है और अपने जिस्म की प्यास बुझा रहा होता है?कहते हैं इंद्र देव का मिज़ाज रंगीन था ! एक बार इंद्र धरती पर अपनी पत्नी इंद्राणी के साथ आये थे, और इंद्राणी को प्यास लगी वे इंद्राणी को वहीं बिठा कर एक गाँव में गए उंहें गाँव में एक खूबसूरत कन्या (उदंती ,जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ में उदंती- सीतानदी रिज़र्व के रूप में स्थित है) को देख कर उनका मन मचल जाता है और उस पर मोहित हो गए ! और उन्हें इंद्राणी का खयाल ही नहीं रहा! तो आप लोग बताइये कि क्या ऐसे चरित्रहीन व्यक्ति को पूजना चाहिए ?जिसे पतिधर्म का पालन करना भी नहीं आता है.
ये विचार भी उन्हीं की देेन है ?क्योंकि पूरे श्रृष्टि का निर्माण उन्हीं ने तो किया है.ईश्वर तो सर्वशक्तिशाली है तो फिर क्यों नहीं अपने शक्ति से इनके मन को स्वच्छ् कर देते? क्या इस लिए नहीं करते कि इससे उनका मनोरंजन
होता है? या तो भगवान अति कमजोर है या फिर भगवान सिर्फ भर्म है ?कहते हैं कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया गंगा जल को जिस जगह पर डाल देते हैं वो जगह  पवित्र हो जाती है और अपवित्र इंसान को भी पवित्र करने की क्षमता रखता है तो फिर मासिक धर्म के वक्त महिला के छूने भर से ये अपवित्र कैसे हो जाते हैं?
क्या कोई आस्तिक है जो भगवान की पूजा निस्वार्थ भाव से करता है या भगवान को बिना किसी अपेक्षा के मानता है? सब भगवान को सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए मानते हैं और पूजा करते हैं अगर बिना अपेक्षा के करते हैं तो उसमें भी स्वार्थ छुपा होता है क्योंकि पूजा करने से खुशी और शांति मिलती है तो हुआ न स्वार्थ! 
 है कोई भगवान और अल्लाह, गॉड का सच्चा भक्त जो इन सवालों का उत्तर दे सकता है??????????????????????????????????? 
                                 काश! 
काश!मंदिरों में छप्पन भोग लगाने की बजाय, भूखे को भोजन खिलाने की पंरपरा होती !
तो मंदिर की चौखट पर भूखे बच्चे नज़र  ना आते! 
काश! पीर बाबा पर चद्दर चढ़ाने के बजाय 
जरूरतमंद को वस्त्र भेट करने की पंरपरा होती,
तो ठंडी से ठिठुर कर किसी की मौत ना होती!
काश !भागवत-भंडारा कराने के बजाय गरीब बच्चों 
के सपने पूरे कराने की पंरपरा होती तो किसी के सपनें जिंदा दफ़न नहीं होतें 
काश! मंदिर ,मस्जिद बनाने के बजाय बेघरों के सर पे छत देने की पंरपरा होती तो कोई बेघर ना होता! 
काश !लोग धर्मवाद,जातिवाद करने के बजाय, मानवतावादी होतें,तो आज धर्म के नाम पर अधर्म नहीं हो रहें होते!               - मनीषा गोस्वामी
           
                                                                    
                       

शुक्रवार, दिसंबर 24, 2021

जिम्मेदारियों के बोझ तले कहीं दरियादिली न दब जाए

बढ़ती उम्र के साथ 
मेरी बैचेनी बढ़ती जाती है|
मैं भी न हो जाऊ बाकियों सी 
ठोड़ी निर्दयी व स्वार्थी ? 
ये बात हरपल सताती है|
सब कहते हैं मुझ से, 
बढ़ी होकर तू भी 
अपने कामों में व्यस्त हो जाएगी, 

फिर तुझे भी भूखे बच्चों 
और गरीबों की चिंता नहीं सतायेगी|
जब दबायी जाएगी तेरी आवाज़, 
तो तू दूसरों के लिए आवाज उठाना भूल जाएगी|
सब कहते हैं मुझ से,
जिम्मेदारियों के बोझ तले
तेरी दरियादिली भी दब जाएगी|

जन्मदिवस मुझे खतरे की घंटी सा लगता है, 
स्वार्थपन की तरफ बढ़ता कदम सा लगता है|
जन्मदिवस पर अपने मैं खुश न हो कर 
ये सोच दुखी हो जाती हूँ कि,कहीं बढ़ी होकर 
मैं भी न अपनों में ही उलझ कर रह जाऊँ? 

रिश्तों के बन्धन में बंधकर, 
सबकी तरह मैं भी स्वार्थी न बन जाऊँ? 
जाने दो, हमसे क्या मतलब'  
कहीं इस महा भयानक मानसिक रोग 
से मैं भी ग्रसित न हो जाऊँ? 
जिस रोग से मनुष्य आधा मर जाता है, 
कहीं मैं भी न मर जाऊँ? 

सब कहते हैं मुझ से वक्त के साथ 
सोच बदल जाती है|
अपने दुःख, दर्द के आगे दूसरों की
पीड़ा नजर नहीं आती है|
डर लगता है कहीं मैं अपने दर्द के आगे 
दूसरों का दर्द न देख पाऊँ? 
कोशिश तो मेरी है 
अपने सिद्धान्तों पर चलने की, 
लोगों की ऊलजलूल बातों को 
गलत साबित करने की|

पर कहीं न कहीं मुझे 
ये बात बहुत डराती है|
अगर ये सच है कि 
उम्र बढ़ने पर लोगों की
सोच बदल जाती है? 
उनके अन्दर की दरियादिली 
ठोड़ी सी भी अगर मर जाती है, 
तो काश कि मेरी उम्र यहीं रुक जाती, 
या मेरी सोच छोटे बच्चे सी हो जाती,
और मैं स्वार्थी होने से बच जाती! 

मंगलवार, दिसंबर 21, 2021

खुद के प्रकाश से चमकना है तुझे

चांद नहीं, सूरज बनना है तुझे|
दूसरों के प्रकाश से नहीं 
खुद की रोशनी से चमकना है तुझे |
लम्बी लताओं-सी परपोषी नहीं, 
दूब-सा स्वपोषी बनना है तुझे|

हजार बार पैरों तले 
कुचलने जाने पर भी
दूब-सा सीना तान उठना है तुझे|
पुनः मस्त मगन हो कर लहराना है तुझे |
शाम - सा ढलकर 
फिर सुबह के सूरज सा चमकना है तुझे|

दूसरों पर निर्भर नहीं 
आत्मनिर्भर बनना है तुझे|
खुद पर उठने वाली उंगलियों को 
ताली वाले हाथ में बदलना है तुझे|
कीचड़ में रहकर भी 
कमल सा खिलना है तुझे|

फूल बनकर भी 
आत्मरक्षा के खातिर
शूल रखना है तुझे|
दूसरों से प्यार करने से पहले 
खुद से प्यार करना है तुझे|
खुद का हाथ खुद ही पकड़कर चलना है तुझे|

गैरों से दोस्ती करने से पहले 
खुद से दोस्ती करना है तुझे|
उदाहरण देना नहीं
बल्कि खुद का उदाहरण 
पेश करना है तुझे|
पद चिन्हों पर चलना नहीं 
खुद के पदचिन्ह छोड़ना है तुझे |


रविवार, दिसंबर 12, 2021

अमीरी गरीबी के बीच की गहरी होती खाई

जैसा कि पिछले साल ही एक संस्था द्वारा यह बात सामने आई थी कि कोरोना काल में दुनिया भर में गरीबी और अमीरी के बीच की खाई बहुत ही गहरी हो चुकी है! जो गरीब था वह और भी गरीब हो गया और जो अमीर था वह और भी अमीर हो गया! करोना काल के चलते! जोकि अत्यंत घातक है! वहीं इस साल की विश्व असमानता रिपोर्ट 2022 के आंकड़े भारत को झकझोर देने वाले हैं! विश्व असमानता लैब के मुताबिक भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जो दुनिया के सबसे अधिक असमानता लिए हुए हैं! इस रिपोर्ट के अनुसार भारत की 10% आबादी 57% नेशनल इनकम अपने पास रखे हुए है! यानी कि अगर जनसंख्या 50 करोड़ है तो मात्र 15 करोड़ लोग ही देश का 57% इनकम अपने पास रखते हैं! और वहीं दूसरी तरफ 50%आबादी के पास सिर्फ 10% के आसपास का धन ही है! रिपोर्ट के अनुसार भारत की 1% जनसंख्या 22% इनकम अपने पास रखती है! यानि कि 1/5 हिस्सा पूरी कमाई का 1% आबादी के पास है! वहीं बॉटम हॉफ के पास 13.1% हिस्सा है! इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में इकोनामिक रिफॉर्म और लिबरलाईजेशन जो हुआ उसके बाद में एक प्रतिशत लोगों को ही इसका सबसे अधिक फायदा हुआ! भारत में जो 1991 में लिबरलाइजेशन ,ग्लोबलाइजेशन और प्राइवेटाइजेशन लाए गए थे जिसके चलते बहुत अधिक तारीफ हुई थी तत्कालीन सरकार की उसके बारे में कहा गया है, कि केवल एक ही प्रतिशत लोगों को इससे फायदा हुआ ! यानी पैसे वाले को और पैसे वाला बना दिया गया और गरीब को और गरीब बना दिया गया!इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या हालात है देश के अंदर !इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में जो वयस्क व्यक्ति (जनसंख्या के आधार पर) दो लाख चार हज़ार रुपये की कमाई करता है अगर वह एक एवरेज कमाई की बात करे तो! जबकि बॉटम 50% यानी 53 हजार रुपये कमाता है ,वही टॉप का जो 10 % है वह लगभग 20 गुना अधिक पैसे कमाता है! इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारे देश में कितनी असमानता आ चुकी है अमीरी और गरीबी के बीच की खाई कितनी गहरी हो चुकी है! जिसको भरना बहुत ही कठिन हो चुका है! यह दिखाता है कि किस ओर बढ़ रहे हैं हम,यह बहुत ही चिंताजनक है! इस खाई को भरनेेे के लिए भारत सरकार को बहुत ही जरूरी और कठोर कदम उठाने होंगे, नहीं तो यह स्थिति बहुत ही विकराल और घातक रूप धारण कर लेगी और फिर इसे बदल पाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा ! इस कारण से लोग उस साम्यवाद का मांग करेंगे जो वर्षों पहले चीन में हुआ था ! जिसमें अमीर लोगों से उनकी संपत्ति छीन कर गरीब लोगों में बांट दी गई थी और उनकी हत्या कर दी जाती थी, जो संपत्ति देने से इनकार करते थे! जिसमें अनेक निर्दोष लोगों की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई थी कि वे अमीर थेें! जैसा कि भारत में वर्तमान में कुछ पार्टियां हैं! जो माओवादी विचारधारा की राहों पर चल रही है !और नक्सलवादी विचारधारा को भी पूर्णतः खत्म नही किया जा सका है!  जबकि बहुत से नक्सलियों को खत्म करने की बात सामने आती रहती है, पर हमें  हमारे नायक भगत सिंह की  यह बात नहीं भूलनी चाहिए -" लोगों को मारकर उनके विचारों को नहीं मारा जा सकता!" ये बात हर  विचारधारा (अच्छी और बुरी) के लिए लागू होती है इसलिए नक्सलियों को मारने से अधिक जरूर है नक्सलवादी विचारधारा को मारना!और अगर ऐसे ही गरीबी और अमीरी के बीच की खाईं बढ़ती रही तो साम्यवादी विचारधारा के नये नये और खतरनाक रूप सामने आ सकतें हैं! जैसे साम्यवादी विचारधारा ने माओवादी और नक्सलवादी आदि खतरनाक विचारधारा का रूप लिया था! इसलिए ऐसी कोई स्थिति आनेेे से पहले जरूरी कदम उठाने की सख्त जरूरत है !  

सोमवार, दिसंबर 06, 2021

निशब्द


उस बस्ती में रोज की तरह आज भी चूल्हे से उठता धुआं बगल में लगे कूड़े के डेर से उठती असहनीय बदबू वहीं पास में खेल रहे बच्चे और बगल में बह रहा गंदा नाला बस्ती से सटी गगनचुंबी बिल्डिंग्स जिसमें हजारों लोग रहते हैं जिस तक पहुंचने के लिए चमचमाती सड़कें जिस पर अनेकों लोग आ जा रहे होतें हैं! पर एकदम शांति थी सिर्फ मोटर कार की आवाज ही आ रही होती है और वहीं बस्ती में शाम के वक्त कुछ ज्यादा ही चहल पहल रहता है भेड़, बकरियों की आवाज बच्चे के रोने की आवाज आदि आ रही होती है! बस्ती तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़कें थी! यह दृश्य अमीरी और गरीबी के बीच की असमानता को साफ साफ दर्शा रहा था! अमीर और गरीब के बीच की खाई दूर से ही देखकर महसूस किया जा सकता था! कच्ची सड़कों पर कुछ बच्चे एक साथ कूड़े से मिले जरूरी सामान को बोरी में भरकर पीठ पर लादे आपस में जोड़ घटाव करते हुए जा रहें होते हैं, कुछ खुश तो कुछ उदास दिख रहें होतें हैं ! तभी बगल से एक लंबी सी चमचमाती कार धूल उड़ाते हुए निकलती है कार को देखकर सभी बच्चे कार के पीछे दौड़ पड़ते हैं यह सोच कर कि कोई सोशल वर्कर उनके लिए कुछ लेकर आया होगा! कार बस्ती के बीचो बीच में जाकर रुकती है! आसपास के सभी बच्चे कार को घेर कर खड़े हो जाते हैं तभी कार का दरवाजा खुलता है जिसमें से घुंघराले बालों अच्छी कद काठी वाला लगभग 45 -55 की उम्र का एक व्यक्ति निकलता है जिसके हाथ में एक मोटी सी डायरी और कलम होती है ,आंखों पर गोल फ्रेम का ऐनक पहन रखा होता है! जो कि एक मशहूर लेखक था पर बच्चों के लिए अजनबी था! सभी बच्चे बड़ी उत्सुकता से उसकी तरफ देख रहे थे! लेखक बच्चों की तरफ देखता है और उनके पास जाता है  खड़े-खड़े ही उनसे कुछ देर बात करता है और अपनी डायरी में कुछ लिखता है! फिर पास की झोपड़ी में चूल्हे पर खाना पका रही महिला के पास जाता है 'चूल्हे के धुए से आपको बहुत तकलीफ होती होगी ,मैं समझ सकता हूं' लेखक वही बगल में पड़ी खाट पर बैठते हुए कहता है! सभी बच्चे लेखक को घेर कर खड़े हो जाते हैं! लेखक वहीं बैठे वृद्ध व्यक्ति से बातें करने लगता है और अपने बारे में बताता है उन्हें बताता है कि वह उनकी गरीबी पर एक किताब लिखने के लिए आया है! इतना सुनकर वृद्ध व्यक्ति के लबों पर एक अजीब सी मुस्कान बिखर जाती है! वृद्ध व्यक्ति मुसकुराते हुए कहता है आपसे पहले भी बहुत लोग आ चुके हैं हमारी गरीबी को कोरे कागज़ पर उतारने के लिए..! खैर, आपकी किताब के लिए जितनी मदद कर सकता हूँ वो करूँगा! लेखक साहब बातें करते करते अपनी डायरी पर कुछ पॉइंट लिख भी रहे थे! तभी एक 15-16 साल का दुबला पतला सा लड़का बच्चों के बीच से बाहर आकर लेखक सेे बोलता है अंकल क्या मैं कुछ पूछ सकता हूं? लेखक कहता है हांं क्यों नहीं !मैं आप लोगों से बातें करने और आप लोगों के बारे में जानने ही तो आया हूं ,बेझिझक पूछो जो पूछना है! 
अंकल हमारी बेबसी को कैमरे में कैद करके बहुतों की जिंदगी चमक जाती है तो फिर हमारी जिंदगी बेरंग ही क्यों रहती है? जब लोग हमारी गरीबी को कोरे कागज मात्र पर उतार कर अमीर और फेमस हो जाते हैं तो हम गरीब क्यों रह जातें हैं? मतलब जिसकी वजह से बहुत से लोग अमीर हो जाते हैं वो गरीब क्यों रहता है? यह सवाल सुनकर लेखक निशब्द हो जाता है और उसकी कलम वहीं की वहीं रुक जाती है.....! मानो उसके शब्दकोश में शब्द ही नहीं रह गए! 

गुरुवार, दिसंबर 02, 2021

सबसे बड़ी सज़ा

अरू आज शॉपिंग से वापस आने के बाद पहले जैसे खुश नहीं थी और ना ही उछलते हुए सभी को अपने कपड़े,सैंडल आदि दिखाने गई! आते ही उसने कमरे में पड़ी टेबल पर शॉपिंग के बैग को रख दिया और कमरे में पड़ी बेड पर तकिए में मुंह छुपा कर लेट गई! तभी वहां उसका भाई नील आया और बोला 'ओए! तुझे क्या हुआ? तू ऐसे लेटी क्यों है? कपड़े नहीं दिखाने सभी  को? ' अरू बोली 'नहीं कुछ नहीं ,बस थक गई हूं मूड नहीं है! इस पर नील अरू को चिढ़ाते हुए बोला अच्छा ! इससे पहले तो कभी नहीं थकती थी! शॉपिंग जाने से पहले तो ऐसे ही चहक रही थी जैसे पहली बार फ्लाइट में बैठने जा रही है! और अब जब सारी शॉपिंग हो गई फिर मुंह क्यों लटका है?'नहीं भाई कुछ नहीं हुआ है! पर तू मेरे रूम में बिना नॉक किए मत आया कर! और हां! जब मैं अकेली रहूं तो तुम मुझसे बात करने रूम में मत आया कर ,अगर कोई काम हो तो बाहर बुला लिया कर!' अरू का यह रूप देखकर नील एकदम हैरान था! उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है? बोला अरू तू ऐसे क्यों बात कर रही है? मैं तेरा भाई हूं और वह भी सगा! शॉपिंग में कोई चीज की कमी रहेगी जो तू मुझ से नाराज है? देख कल तेरा बर्थडे है और मुझे तेरी यह शक्ल बिल्कुल भी पसंद नहीं मुझे  तेरी स्माइल देखनी है! 'हो गया तुम्हारा, तो अब जाओ यहाँ से! मुझे कुछ देर अच्छा महसूस कर लेने दे ! प्लीज! ये सुनकर नील बहुत दुखी होता है और उदास होकर वहां से चला जाता है! रात के 12:00 बजते ही नील अरु के रूम में बर्थडे विश करने आता है और जैसे ही बर्थडे विश करता है, अरू उस चिल्ला पड़ती है, तुम इतने असभ्य कैसे हो सकते हो ?रात के 12:00 बजे एक लड़की के रूम में.......! तुम ऐसी हरकत करने से पहले ये क्यों नहीं सोचते कि सामने वाला क्या महसूस कर रहा है वह तुम्हारे साथ सहज महसूस करता है या नहीं? यह सुनकर नील बोला पर तू तो रात में डरने पर मेरे पास आ जाती थी,क्योंकि तू मेरे पास खुद को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करती थी फिर ऐसा क्या हुआ जो तू ऐसी बातें कर रही है? तेरी सोच इतनी घटिया कैसे हो गई? छी...!मैं देख रहा हूं कल मार्केट से आने के बाद से तू मेरे साथ ऐसे विहैव कर रही है जैसे मैं तेरा भाई नहीं बल्कि कोई अजनबी हूँ! 'मेरी सोच घटिया नहीं बल्कि तुम घटिया इंसान हो !' और क्या कहा सुरक्षित महसूस करती थी मैं तुम्हारे साथ, हां करती थी पर कल मॉल में तेरा जो रूप देखा उसके बाद बिल्कुल भी सुरक्षित महसूस नहीं करती हूं! डर लगता है मुझे तेरे साथ! आश्चर्य से नील बोला! कौन -सा रूप?  अरू बोली 'तुम्हें सच में नहीं मालूम...? कल उस लड़की को गंदी नजर से देखने वाले तुम नहीं थे तुम्हारा भूत था क्या? इतना सुनते ही नील के चेहरे का रंग उड़ गया! अरू आगे बोलती है तुम गंदी नजर से उस लड़की को देख रहे थे पर तुम्हारी नजरें चुभ मुझे रही थी, असहज मैं महसूस कर रही थी, तुम्हारी नजरें निवस्त्र उस लड़की को कर रही थी पर निवस्त्र मैं भी हो रही थी! और तुम्हारा चरित्र भी मेरे सामने निवस्त्र हो रहा था! तुम मेरे रक्षक और बाकियों के लिए भक्षक क्यों हो? भाई ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि जितना सुरक्षित और सहज मैं तेरे साथ महसूस करती हूं उतना बाकी लड़कियां भी करें? अगर कोई लड़का दूसरी लड़कियों के लिए भक्षक ना बने तो उसे अपनी बहन का रक्षक बनने की जरूरत ही ना पड़े! मुझे हंसते हुए देखना चाहते हो, मुझे तोहफा देना चाहते हो ना ?तो तुम मुझे अपनी ये बुराइयां दे दो तोहफे में! मैं इस साल कैंडल नहीं बल्कि तुम्हारी इस बुराई को जलाना चाहती हूं! दे सकते हो...? अरू का नील के साथ असुरक्षित महसूस करना नील के लिए सबसे बड़ी सज़ा थी! नील पत्थर की मूरत सा खड़ा जमीन को देखे जा रहा था और उसकी आंखों से अश्रुधारा बह रही थी! उसके आंसुओं के साथ उसकी बुराइयां भी बह रही थी! अपने आंसुओं से अपनी गुनाहों का  प्रायश्चित कर रहा था! 

सोच का नया नजरिया

चित्र गूगल साभार निती अभी कक्षा आठ में पढ़ती, है अपनी माँ करुणा की तरह समाजसेवी बनने का और वृद्धाश्रम खोलने का सपना है।आज उसका म...