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| तस्वीर गूगल से |
धूमिल- सा , बेरंग, बेनूर
और उदास हो जाएगा!!
कोई पंछी उड़ता हुआ,
नजर नहीं आएगा!!
ना ही बादलों का रंग
असंख्य मूर्तियां बनाएगा!!
रात में तारों की मौजूदगी का
कोई निशान नहीं रह जाएगा!!
ना हवाओं में शोर होगा,
और समंदर भी ठहर जाएगा!!
सूर्योदय से पूर्व
उषा की चुनरी का
चंपई अलोक नहीं रह जाएगा!!
आसमान की छाती में सुराख़ कर,
देवदार नहीं भूल पाएगा!!
आसमान की सांस लेने की
कोई आहट ना होगी!!
पहाड़ों की नोक में
चमकती बर्फ की परत ना होगी!!
बर्फ की आहों का घुट-घुटा धुआं
भी नजर नहीं आएगा!!
सूर्य की किरणों के चुभन से
सी-सी करती धरती का
स्वर हमेशा के लिए दब जाएगा!!
विज्ञान की दो धारी तलवार के
एक गलत वार से
मनुष्य एक दिन खुद को ही
कभी न भरने वाला घाव दे जाएगा!!
एक धमाके की आवाज के साथ
सन्नाटा पसर जाएगा!!
