शनिवार, नवंबर 27, 2021

ये कलम हर बार कमाल करती है!

जब आहत होती विश्व के क्रंदन से
तब ये कलम, 
कोरे कागज़ को रंगीन करती है! 
जब जब होता है 
अभिव्यक्ति की आज़ादी पर वार, 
तब तब कलम की तेज धार 
शब्द रूपी बड़ों से करती है प्रहार! 
जब मन में क्रोध का फूटता है अंगार, 
तब कलम की तेज धार से 
कोरे कागज पर 
शब्दों का उमड़ता है सैलाब! 
कभी दर्द तो कभी 
दिल के अरमान लिखती है 
कभी मधुर मुस्कान 
तो कभी अश्रुधार  लिखती है! 
जब मन में उमड़ता है
सवालों का तूफान 
तब ये कलम करती है जनसंचार! 
जब करता है कोई उपहास 
तब यह कलम बन तलवार का 
रूप धारण करती है! 
किए बिना रक्त रंजित घायल करती है! 
कभी प्रफुल्लित होकर 
कोरे कागज का मंत्रमुग्ध 
करने वाला श्रृंगार करती है ! 
कभी प्यार की बौछार करती है, 
तो कभी गुस्से का अंगार उगलती है
ये कलम हर बार कमाल करती है! 

शनिवार, नवंबर 20, 2021

क्यों नन्ही सी कली खिलने से पहले ही तोड़ दी जाती है?

क्यों हमारे सपने डायरी के पन्नों में 
ही सिमट कर रह जाते हैं ?
क्यों बाहर निकलने से घबराते हैं ?
यदि डायरी से बाहर आ भी जाते हैं 
तो एक ऊंची उड़ान भरने से पहले 
क्यों उनके पंख तोड़ दिए जाते हैं ?
सपनों की दुनिया 
क्यों एक डायरी में ही 
सिमट कर रह जाते हैं? 
क्यों हमारी ख्वाहिशों का 
खुली हवा में एक लंबी सांस भरने से 
पहले गला घोट दिया जाता है? 
हमारी आंखों में सुनहरे सपने 
पलने से पहले ही 
क्यों खौफनाक मंजर भर दिए जाता है ? 
क्यों हमें अपने सपने को 
सिर्फ डायरी तक ही सीमित 
रखने का अधिकार है ? 
क्यों हमारे विचारों को चारदीवारी में 
कैद करने का हर संभव प्रयास किया जाता है? 
क्यों हमारे अपनों द्वारा हमेशा 
यह नसीहत दी जाती है , 
कि घर के बाहर के मामले में 
दखल करना लड़कियों के संस्कार नहीं ? 
क्यों हमेशा हमें संस्कारी बनाने के 
नाम पर बेचारी बनाया जाता है? 
क्यों हमेशा हमें  सिर्फ सहना 
सिखाया जाता है? 
कुछ तो कर रहीं अंतरिक्ष में नाम दर्ज, 
तो कुछ निभा रहीं देश भक्ति का फर्ज! 
पर कुछ अभी कर रही चौखट के 
बाहर निकलने का ही संघर्ष! 
क्यों कुछ को चौखट के 
बाहर जाने का भी अधिकार नहीं? 
क्यों पुत्र मोह में अंधी मां द्वारा
नन्ही-सी कली खिलने से 
पहले ही तोड़ दी जाती है? 
क्यों कुछ इस दुनिया में 
आने के खातिर कर रहीं हैं संघर्ष? 

सोमवार, नवंबर 15, 2021

खेल-ए-जिंदगी

अचानक महसूस होता है 
कि मैं क्यों हूँ ? 
अचानक मरने की इच्छा, 
अचानक मरने का डर! 
अजीब-सी है मन में हलचल ! 
अचानक क्रोध,
अचानक हंसी का नाट्य, 
कभी लगता, हूँ बिमार, 
कभी अत्यंत कमजोर
तो कभी मजबूत चट्टान! 
अजीब से हैं हालात! 
कभी भीड़ में भी 
तन्हाई का एहसास 
और कभी अकेले में 
भी हजारों के साथ! 
सुख की निर्मम भोलेपन में 
छिप जाती दुख की गठरी, 
कभी जिंदगी पकड़ती रफ़्तार 
तो कभी लगती ठहरी! 
कभी जिंदगी सर्द की 
सुनहरी धूप-सी 
तो कभी लगती 
जेठ की तपती दोपहरी! 

               चित्र गूगल से साभार


शुक्रवार, नवंबर 05, 2021

नई राष्ट्रीय जल नीति

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा नई जल नीति बनाने के लिए 11 सदस्यों वाली एक ऐसी कमेटी का गठन किया गया है जिसके अध्यक्ष मिहिर शाह को बनाया गया है! इन 11 सदस्यों को लोगों के बीच जाकर जनता( बड़े-बड़े कॉलेज अनुसंधानों, संस्थाओं आदि से )जल आपूर्ति के बारे में और मुख्य कारण और समाधान के तरीकों पर राय लेनेपूछने का काम दिया गया !  इस मुहिम के जरिए अभी तक 124 सलाह प्राप्त हुई है! और मुख्य कारण सामने आए हैं! 
जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण बिंदु
कृषि में विविधता-भारत में 80-90% पीने का पानी खेती के काम करने में लाते हैं! यह बात जानकर आप सोच रहे होंगे कि अगर खेती नहीं करेंगे तो खाएंगे क्या? तो यह जानकर हैरानी होगी कि असल में उन क्षेत्रों में पीने के पानी को सिचाई के उपयोग में लिया जा रहा,जोकि भौगोलिक रूप से उस प्रकार की खेती के लिए नहीं बने हैं! जिसकी कर रहें हैं! जैसे हरियाणा, पंजाब यह वह क्षेत्र है जहां चावल की खेती अधिक होती है, पर असल में यह जलवायवीय रूप से चावल की खेती करने के लिए अनुकूल नहीं है! क्योंकि चावल की खेती वास्तविक रूप से उन क्षेत्रों में होती है जहां पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है! तो आप सोच रहे होंगे कि पंजाब हरियाणा में तो पानी की मात्रा बहुत ही है, फिर ऐसा क्यों कह रहे हैं! 
सबको पता है कि औसत जल वर्षा से पानी की मात्रा का पता लगाया जाता है इसलिए हमने जमीन से कितना पानी निकाला यह मायने नहीं रखता बल्कि यह मायने रखता है कि हमें बारिश से कितना पानी प्राप्त हुआ! इस हिसाब से पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल जो जलवायवीय रूप से चावल की खेती करने के लिए अनुकूल है! जबकि पंजाब और हरियाणा में नहरों और हरित क्रांति के दौरान अंडर ग्राउंड वाटर को निकालने के लिए बनाई गई तकनीक से चावल की खेती होती है! जिससे अंडर ग्राउंड वाटर में जबरदस्त कमी आई अर्थात यह क्षेत्र जलवायवीय रूप से चावल की खेती करने के अनुकूल नहीं है फिर भी चावल के सबसे अच्छे उत्पादक राज्यों में आता है!जिस पानी से खेती हो रही है उसका उपयोग पीने के पानी में करने की जरूरत है! तो सवाल उठता है कि पंजाब और हरियाणा वाले कृषि करना बंद कर दें? तो बता दे कि कृषि बंद करने की कोई जरूरत नहीं है बस कृषि में विविधता लाने की  जरूरत है अर्थात जो क्षेत्र भौगोलिक रूप से जिस खेती के लिए अनुकूल हैं उस क्षेत्र में उसी की खेती की जानी चाहिए जिससे पीने कि पानी की कमी ना हो! और सरकार को चाहिए कि 31 फसलों के अतिरिक्त अन्य फसलों पर पर भी एमएसपी(न्यूनतम समर्थन मूल्य) या फिर सब्सिडी दे! जिससे किसान बेझिझक उन फसलों की खेती करें! इससे पानी का सदुपयोग होगा और पीने के पानी की किल्लत खत्म होगी! 
• आपूर्ति-पक्ष उपाय- राजस्थान जैसे राज्यों जिनमें  पानी की कमी है और वहांं पानी नहरों से पहुंचाने के बजाय पाइप लाइन से पहुंचाया जाना चाहिए जाए! जिससेेे वाटर का वेपर कम बनेगा और पानी रिस रिस कर जमीन में कम जाएगा ! जिससे बिना बर्बाद हुए  वहां पहुंंच जाएगा जहाँ जरूरत है और खर्चा भी होगा! 
और भी बहुत से कारण और समाधान के उपाय बताये गये हैं जो बहुत लागू भी होने वाले हैं! 

रो रही मानवता हँस रहा स्वार्थ

नीला आसमां हो गया धूमिल-सा बेनूर और उदास,  स्वच्छ चाँदनी का नहीं दूर तक  कोई नामों निशान। रात में तारों की मौजूदगी के  बचें नहीं...