सोमवार, जनवरी 31, 2022

नेताओं का भी दर्द तो समझों कोई (व्यंग्य)

वादे नये इरादे पुराने हैं।
नेताजी हमारे बड़े दिलवाले।
कब अकड़ना है और कब पैर पकड़ना है
नेता जी ये बड़े अच्छे से जाने।
आपत्ति में भी अपने लिए अवसर ढूढ़ने वाले।
वक़्त पड़ने पर जनता जनार्दन बोलकर 
जनता के चरणों में लोटने वाले।
वक्त आते ही अपने चरणों में लोटवाने वाले। 
नेता जी हमारे बड़े दिलवाले।
ना जातिवाद करते हैं ,ना भेदभाव करते हैं।
सभी को एक ही तराजू में तौलने का दावा करते हैं।
जनता नासमझ है तो क्या करें नेता जी? 
भेदभाव,जातिवाद तो आम लोग करते हैं।
नेताजी तो ऐसे लोगों का 
सिर्फ हौसला बुलंद करते हैं।
अपने प्रपौत्र के बेटे के सुनहरे भविष्य के लिए 
बस कुछ हजार युवाओं के 
वर्तमान को धूमिल व बेरंग ही तो करते हैं ।
ऐसा तो हमारे नेता जी 
स्वावलंबी बनने के खातिर करते हैं।
चुनाव के वक्त आम जनता को 
कर्ताधर्ता बताते हैं और सबसे खास होने का
एहसास कराते हैं।
चुनाव के बाद आम जनता की चटनी बनाते हैं।
और अपने हिसाब से इस्तेमाल करके चुनावी व्यंजन का 
जायका भी आम जनता से ही तो बढ़ाते हैं।
ऐसे ही तो नेता जी  हमेशा आम जनता को खास बनाते हैं।
साफ कुर्ते-पजामे के साथ नेताजी 
दिल काला भी तो रखते हैं।
फिर भी लोग सफेद धोती कुर्ते को
ही नज़र लगाते रहते हैं।
इतनी खूबियां होने के बाद भी 
            नेताजी को लोग भला बुरा पता नहीं क्यों कहते हैं
अक्सर नेता जी की आंखें नम हो जाती हैं 
      ये सोच कर कि लोग उनके दर्द को क्यों नहीं समझते हैं।
                                 मनीषा गोस्वामी

34 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ... कमाल का व्यंग है ...
    सच है नेताओं की तो सुन ले कोई ... पर ये इतने बेचारे भी नहीं हैं ...

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    1. नेताजी वो भी बेचारे...🤣
      धन्यवाद आदरणीय सर🙏

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  2. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 01 फरवरी 2022 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    उत्तर
    1. मेरी रचना को 5 लिंकों में जगह देने के लिए आपका तहे दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद प्रिय मैम🙏

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  3. चुनाव के बाद आम जनता की चटनी बनाते हैं।
    और अपने हिसाब से इस्तेमाल करके चुनावी व्यंजन का
    जायका भी आम जनता से ही तो बढ़ाते हैं।
    ऐसे ही तो नेता जी हमेशा आम जनता को खास बनाते हैं।
    ... बिल्कुल सही कहा मनीषा नेता गण चुनाव के समय में आम जनता को खूब अच्छी तरह इस्तेमाल करते हैं इसके बाद उनकी तरफ झांकते भी नहीं ।
    इन नेताओं का क्या ? इन्हें पहले से ही राजनीति करनी है वह तो हर तरह से आम लोगों को इस्तेमाल करेगा, परंतु हमारी आधी से ज्यादा जनसंख्या जो इन नेताओं के पीछे तन मन धन से भागती है, इस समय राजनीति का आलम देखो, गांव से कस्बों तक केवल नेताजी छाए हैं उन नेताओं के पीछे पूरी जनता अपना सब काम छोड़कर ऐसे स्वागत कर रही है, जैसे वही विधायक बन जाएगी और अपना सारा दुख दूर कर लेगी । हर व्यक्ति राजनीति में इतना मगन है कि नेता जी के आगे बिछे जा रहे ।
    राजनीति हमारे समाज को खा रही है । और आम इंसान राजनीति के छलावे में अपने कर्म को भूल फ्री के चक्कर में मारामारा फिर रहा है और नेता जीवन के सारे आनंद अपनी झोली में डाल लेते हैं । व्यंगात्मक शैली में एक यथार्थवादी और चिंतन पूर्ण सृजन के लिए बहुत शुभकामनाएँ प्रिय मनीषा ।

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    1. यही तो सबसे बड़ी समस्या है हमारे देश की यह सच है कि हमारे देश के राजनेता घटिया राजनीति करतें है पर यह भी सच है कि इसे करने का मौका कहीं ना कहीं आम जनता ही देती है राजनेताओं को! अगर आम जनता जागरूक हो जाए तो इनकी हिम्मत ना हो ऐसी राजनीति करने की इन्हें भी पता है कि ऐसी राजनीति करके हम आसानी से जीत सकते हैं इसलिए ऐसा करते हैं चुनाव के वक्त फ्री के नाम पर जनता को 5 साल लूटते रहते हैं और दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि जनता इनके जाल में बहुत आसानी से फंस जाती है! यह तो शिकारी है इनका काम ही है! चमचागिरी करने वालों की तो बात ही क्या करें ऐसा चमचागिरी करते हैं कि देखकर खून खौल जाता है स्वतंत्रता सेनानी और शहीदों की पुण्यतिथि इन चमचों को याद ना रहे पर नेताजी के पिता की, चाचा की, दादा की,नाना की सबकी,पूण्यतिथि व जन्मदिवस याद रहेगा और अपनी संवेदनाएं और अपनी भावनाएं व्यक्त करने में देरी नहीं करेंगे लेकिन जो हमारे देश के असली हीरो हैं उन्हें याद नहीं रखते!इतना सम्मान मिलेगा इन नेताओं को कैसे ऐसी घटिया राजनीति छोड़ देगें?
      इतनी बेहतरीन प्रतिक्रिया देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद प्रिय मैम आपकी प्रतिक्रिया ने मेरी इस रचना की शोभा और भी बढ़ा दी है🙏🙏

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  4. वाह!प्रिय मनीषा जी लाज़वाब 👌
    नेता जी सब भली भांति जानते है।
    सादर

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  5. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (1-2-22) को "फूल बने उपहार" (चर्चा अंक 4328)पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

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    1. मेरी रचना को चर्चामंच में जगह देने के लिए आपका तहे दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद प्रिय मैम
      चर्चामंच में जगह मिलने से लिखते रहने की हिम्मत मिलती है जिसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद🙏

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  6. वाह
    क्या बात है
    बहुत बढ़िया से धो डाला

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  7. घूम-फिर कर बात फिर हम तक आ जाती है ! हम ही से कोई स्याना छिटकता है और हम ही उसे चढ़ाते हैं और फिर हमारे ही कंधों पर बैठ वह हमें ही.....बनाता है ! वह यह भी अच्छी तरह जानता है कि उसके कुकर्मों की यदि सौ लोग खिलाफत करेंगे तो दस उसकी तरफ भी आ खड़े होंगे ! उन्हीं दस की शह पर वह अपनी करनी से बाज नहीं आता ! ऐसों को तो समय ही सबक सिखाता है, पर वह देर बहुत लगाता है

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    1. जी आप बिल्कुल सही कह रहे हैं!अगर आम जनता यानि कि हम सब इतने जागरुक हो जाए तो ऐसा हो ही न राजनीति नहीं गलत होती राजनीति तो लोकतंत्र की देन है और लोकतंत्र का अर्थ है जनता के साथ शासन करना ना कि जनता पर शासन करना पर हम लोगों ने इन्हें खुद पर शासन करने का अवसर दे दिया है जिसका यह लोग भरपूर फायदा उठा रहें हैं!
      इतनी विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद आदरणीय सर🙏

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  8. वे जानते हैं कि यह सब कुछ दिन की ही बात है और फिर मजे ही मजे होंगे
    जनता के सेवक कहलाने वाले फिर जनता को सेवक बनाते देर कहां लगाते हैं

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    1. आप बिल्कुल सही कह रही हूं यह सब पता होता है झुकते ही है जनता को अपने आगे झुकाने के लिए!
      प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आदरणीय मैम🙏

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  9. वाह!वाह!प्रिय मनीषा जी 👌
    सादर

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  10. बहुत खूबसूरत सृजन

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  11. समसामयिक रचना । वैसे तो नेता सभी वो लोग जो जनता का नेतृत्त्व करते हुए चुनाव में हिस्सा लेते हैं लेकिन या तो नेताजी हुए थे सुभाष चंद्र बोस या आज कल नेता जी हैं मुलायमसिंह यादव ।

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    1. जी आप सही कह रहीं हैं! पर यहाँ चुनाव लड़ने वाले के लिए है!
      बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय🙏

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  12. वाह!!!
    बहुत सटीक समसामयिक...
    धारदार ...कमाल का खाका खींचा है सभी नेताओं का।
    लाजवाब सृजन।

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    1. बहुत बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मैम🙏

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  13. वाह! नेताओं की पूरी पोल पट्टी खोल कर रख दी है आपने, बड़ी पैनी नज़र है

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    1. मनोबल संवर्धन करती उपस्थिति के लिए हृदय से असीम धन्यवाद🙏

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  14. वाह !! बहुत खूब ! सटीक व्यंग्यात्मक सृजन ।

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    1. मनोबल संवर्धन करती उपस्थिति के लिए हृदय से असीम धन्यवाद आदरणीय मैम 🙏

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  15. बहुत शानदार व्यंग्य... पर हमारे नेताओं के समझ मे कहा आने वाली ये बातेँ

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    1. जी आप सही कह रहे हैं नेताओं के समझ में कहाँ आने वाली!
      धन्यवाद सर 🙏

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