रविवार, 21 फ़रवरी 2021

उसके भी थे कुछ सपने!

उसके भी थे कुछ सपने!
अभी वो खुद को भी ठीक से समझ नहीं सकी थी
कि दूसरों को समझने की बारी आ गई
खुद के पैरों पर खडी़ होती उससे पहले
किसी का सहारा बनने की जिम्मेदारी उसके कंधे पर आ गई
अभी वो खुद से ठीक से रू -ब -रू भी नहीं हुई थी
कि इक नई जान को इस दुनियाँ से रूबरू कराने की जिम्मेदारी आ गई 
गाल गुलाबी होते उससे पहले
उसके हाथ पीले हो गए
उसकी आँखों में सुनहरे सपने पलने से पहले
टूट कर चकनाचूर हो गए
उसके भी थे कुछ सपने
पर नहीं समझ सके उसके अपने
अपना कहती किसी को उससे पहले
उसके अपने पराये हो गए
धूम धाम से करके तैयारी 
बना दिया उसे समाज की नजरों में अबला नारी


(बाल विवाह का सिकार होने वाली लड़कियों के दर्द को अपनी टूटी -फूटी पंक्तियों से बयां करने का इक छोटा  -सा प्रयास)



43 टिप्‍पणियां:

  1. अधिकांश भारतीय कन्याओं के जीवन का मर्माहत कर देने वाला सत्य है यह । जिस पर बीतती है, अपने मन की पीड़ा को वही जानती है ।

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  2. प्रिय मनीषा,
    बहुत सुंदर कविता बाल -विवाह की कुरीति को दर्शाती हुई।
    बहुत सुंदर लिखा। मैं भी आपकी तरह विद्यार्थी हूँ।
    मेरे भी ब्लॉग पर आना।

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  3. प्रिय मनीषा , बाल विवाह से किसी लड़की के अनगिन सपने तबाह हो जाते हैं क्योंकि उसकी देह कोमल और सोच अपरिपक्व होती है | बहुत अच्छा लिखा आपने | आप एक विद्यार्थी हैं सो आपकी ये रचना अनमोल है क्योकि इसमें समाज के प्रति आपकी संवेदनशीलता और दायित्वबोध दिखाई पड़ता है| | साहित्य में आप जैसे युवाओं का आना साहित्य के लिए शुभ संकेत है| यूँ ही लिखने का अभ्यास करती रहिये मेरी शुभकामनायें और स्नेह आपके लिए | |

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    1. इतना सारा प्यार और मेरा हौसला बढ़ाने के लिए के लिए मैम आपको तहे दिल से धन्यवाद!

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  4. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना।

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  5. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार (२५-०२-२०२१) को 'असर अब गहरा होगा' (चर्चा अंक-३९८८) पर भी होगी।

    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    अनीता सैनी

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  6. मेरी कविता को' असर अब गहरा होगा'(चर्चा अंक ) में सामिल करने के लिए तहेदिल से शुक्रिया!

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  7. बाल विवाह की वेदना को बहुत सुंदर से उकेरा है आपने।
    सार्थक सृजन।
    समाज की इस मानसिकता की शिकार बच्चियां बचपन कहां भोग पाती है सीधी बड़ी हो जाती है।
    चिंतन परक रचना।
    बधाई।

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  8. बहुत सुन्दर और हृदयस्पर्शी सृजन मनीषा जी ।

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  9. वैसे तो अब बालविवाह पर रोक है । लेकिन हो सकता है कि अब भी कहीं कहीं किये जाते हों ।संवेफनशील रचना ।

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    1. मैम! हमारे सविधान ने तो बालविवाह पर रोक लगा रखा है पर गाँव की हकीकत कुछ और ही है!समाज के साथ कानून के रखवाले भी आंखें बंद कर रखते हैं! 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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  10. बाल-विवाह के दर्द को कोमल शब्दों में पिरोया है आपने,हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति मिनिषा

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  11. जाने कितनी ही लड़कियों के सपने यूँ ही दिल में सपने बनकर रह जाते हैं
    मर्मस्पर्शी रचना
    बहुत अच्छा लिखती हैं आप, लिखते रहिये

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  12. प्रयास अत्यंत प्रभावी है । शुभकामनाएँ ।

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  13. प्रभावशाली लेखन। ढेरों बधाई और शुभकामनाएँ।

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  14. बहुत ही चिंतनीय विषय उठाया है आपने प्रिय मनीषा..ऐसे ही सुन्दर लेखन करती रहें..यही शुभकामनाएं हैं..मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है..

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  15. बालविवाह को केंद्र में रखकर
    लिखी गयी प्रभावी रचना
    बधाई

    आग्रह है मेरे ब्लॉग को भी फॉलो करें

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  16. बाल विवाह के त्रासद सत्य को प्रभावी रूप से वर्णित किया है आपने।
    बहुत अच्छा लगा आपका ब्लॉग।

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  17. उच्चारण पर ध्यान दीजिए
    उदाहरणार्थ....
    (बाल विवाह का सिकार होने वाली लड़कीयो के दर्द को अपनी टुटी फुटी पंक्तियों से बयां करने का इक छोटा -सा प्रयास)
    बाल विवाह का शिकार होने वाली लड़कियों के दर्द को अपनी टूटी-फूटी पंक्तियों से बयां करने का एक छोटा प्रयास
    लिखते चलिए
    हम पढ़ते रहेंगे
    सादर

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    1. हमारी त्रुटि को हमें ज्ञात कराने के लिए तहेदिल से धन्यवाद🙏💕🙏💕

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  18. कविता के भाव बहुत गहरे हैं... बधाई

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  19. आपका बहुत बहुत धन्यवाद और आभार सर 🙏🙏

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