शनिवार, 27 नवंबर 2021

ये कलम हर बार कमाल करती है!

जब आहत होती विश्व के क्रंदन से
तब ये कलम, 
कोरे कागज़ को रंगीन करती है! 
जब जब होता है 
अभिव्यक्ति की आज़ादी पर वार, 
तब तब कलम की तेज धार 
शब्द रूपी बड़ों से करती है प्रहार! 
जब मन में क्रोध का फूटता है अंगार, 
तब कलम की तेज धार से 
कोरे कागज पर 
शब्दों का उमड़ता है सैलाब! 
कभी दर्द तो कभी 
दिल के अरमान लिखती है 
कभी मधुर मुस्कान 
तो कभी अश्रुधार उधार लिखती है! 
जब मन में उमड़ता है
सवालों का तूफान 
तब ये कलम करती है जनसंचार! 
जब करता है कोई उपहार 
तब यह कलम बन जाती है तलवार
किए बिना रक्त रंजित घायल करती! 
कभी प्रफुल्लित होकर 
कोरे कागज का मंत्रमुग्ध 
करने वाला श्रृंगार करती है ! 
कभी प्यार की बौछार करती है, 
तो कभी गुस्से का अंगार उगलती है
ये कलम हर बार कमाल करती है! 

शुक्रवार, 19 नवंबर 2021

क्यों नन्ही सी कली खिलने से पहले ही तोड़ दी जाती है?

क्यों हमारे सपने डायरी के पन्नों में 
ही सिमट कर रह जाते हैं ?
क्यों बाहर निकलने से घबराते हैं ?
यदि डायरी से बाहर आ भी जाते हैं 
तो एक ऊंची उड़ान भरने से पहले 
क्यों उनके पंख तोड़ दिए जाते हैं ?
सपनों की दुनिया 
क्यों एक डायरी में ही 
सिमट कर रह जाते हैं? 
क्यों हमारी ख्वाहिशों का 
खुली हवा में एक लंबी सांस भरने से 
पहले गला घोट दिया जाता है? 
हमारी आंखों में सुनहरे सपने 
पलने से पहले ही 
क्यों खौफनाक मंजर भर दिए जाता है ? 
क्यों हमें अपने सपने को 
सिर्फ डायरी तक ही सीमित 
रखने का अधिकार है ? 
क्यों हमारे विचारों को चारदीवारी में 
कैद करने का हर संभव प्रयास किया जाता है? 
क्यों हमारे अपनों द्वारा हमेशा 
यह नसीहत दी जाती है , 
कि घर के बाहर के मामले में 
दखल करना लड़कियों के संस्कार नहीं ? 
क्यों हमेशा हमें संस्कारी बनाने के 
नाम पर बेचारी बनाया जाता है? 
क्यों हमेशा हमें  सिर्फ सहना 
सिखाया जाता है? 
कुछ तो कर रहीं अंतरिक्ष में नाम दर्ज, 
तो कुछ निभा रहीं देश भक्ति का फर्ज! 
पर कुछ अभी कर रही चौखट के 
बाहर निकलने का ही संघर्ष! 
क्यों कुछ को चौखट के 
बाहर जाने का भी अधिकार नहीं? 
क्यों पुत्र मोह में अंधी मां द्वारा
नन्ही-सी कली खिलने से 
पहले ही तोड़ दी जाती है? 
क्यों कुछ इस दुनिया में 
आने के खातिर कर रहीं हैं संघर्ष? 

सोमवार, 15 नवंबर 2021

खेल-ए-जिंदगी

अचानक महसूस होता है 
कि मैं क्यों हूँ ? 
अचानक मरने की इच्छा, 
अचानक मरने का डर! 
अजीब-सी है मन में हलचल ! 
अचानक क्रोध,
अचानक हंसी का नाट्य, 
कभी लगता, हूँ बिमार, 
कभी अत्यंत कमजोर
तो कभी मजबूत चट्टान! 
अजीब से हैं हालात! 
कभी भीड़ में भी 
तन्हाई का एहसास 
और कभी अकेले में 
भी हजारों के साथ! 
सुख की निर्मम भोलेपन में 
छिप जाती दुख की गठरी, 
कभी जिंदगी पकड़ती रफ़्तार 
तो कभी लगती ठहरी! 
कभी जिंदगी सर्द की 
सुनहरी धूप-सी 
तो कभी लगती 
जेठ की तपती दोपहरी! 

               चित्र गूगल से साभार


मंगलवार, 9 नवंबर 2021

संघर्ष-ए-जिंदगी


कहते हैं कि दुख के बाद सुख आता है पर अनुभव कुछ और ही कहता है! 
यह कहानी एक ऐसी औरत की है जिस की जिंदगी में दु:ख के बाद सुख नहीं आया बल्कि और भी बड़ा दुख आता रहा, जिसके पति ने उसे कभी वह इज्जत नहीं दी, जो एक पति को अपनी पत्नी को देना चाहिए! पर उसी पति की वजह से नात-रिश्तेदार में थोड़ी इज्जत मिलती थी! उनके पति शिक्षामित्र थे, इसलिए अनपढ़ होने पर भी लोग उन्हें मास्टराइन (मास्टरनी जी) कहकर बुलाते थे! मुझे ठीक से तो नहीं पर इतना याद है कि एक बार जब कुछ छात्राएं अपने अध्यापक की पत्नी यानी की उस महिला से न चाहती थी तो किस तरह उनके घर के कुछ लोगों ने उन्हें, उनके पति की पत्नी के रूप में परिचय ना करा कर,उनके पति की भाभी को पत्नी के रूप में परिचय कराया छात्राओं से! सिर्फ इसलिए क्योंकि वो उतनी खूबसूरत नहीं थी जितनी कि उनकी जेठानी! लेकिन एक बार भी किसी ने नहीं सोचा कि उन पर क्या बीतेगी! और उन्होंने इस बात का विरोध भी किया पर उंगलियां उन्हीं पर उठाई गई! सालों घरेलू हिंसा का शिकार होती रहीं ये सोच कर कि एक दिन उनका दिन भी आएगा! कितनी मार उनको पड़ती थी! उनके छोटे छोटे बच्चों के सामने उन्हें कैसे जलील किया जाता था ! मुझे याद है किस तरह एक बार जब उनके पति रात को शराब के नशे में उन्हें पीट रहें थे तब उन्होंने एक ऐसी गलती कर दी जो उन्हें नहीं करनी चाहिए थी! इस बात के लिए सभी ने उन्हें जलील भी किया और उसकी गलती का एहसास भी कराया और वो अपनी गलती पर शर्मिंदा भी थी! कुछ दिनों तक घर से बाहर भी नहीं निकलीं! लेकिन उनके पति को कभी भी उनकी गलती का एहसास नहीं कराया गया जोकि उनकी गलती की तुलना में बहुत ही बड़ी गलती थी! कराते भी कैसे क्योंकि सदियों से चल आया है कि अगर कोई गलत काम पुरुष करें तो उस पर उतनी उंगलियां नहीं उठती जितनी की एक महिला के गलती करने पर उठती! मुझे ठीक से तो नहीं पर थोड़ा बहुत याद है कि किस तरह वह अपनी मानसिक स्थिति खो बैठी थी दूसरे बच्चे के पैदा होने के बाद बच्चे की नाजुक स्थिति देख कर! जिंदगी भी कैसे-कैसे खेल खेलती है जिसे कुछ दिन पहले लोग हाफ माइंड कहते थे वो सच में पागल होने की स्थिति में थी! कुछ समय बाद जब उनकी हालात में थोड़ा सुधार आया और सब कुछ नॉर्मल होने लगा तभी उन्हें अपने पति का किसी दूसरी महिला से अवैध संबंध के बारे में पता चला! तो उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया पर फिर से उंगलियाँ उन्हीं पर उठाई गई! कोई कहता था कि इनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है इसलिए यह कुछ भी बकती रहती है लेकिन पता सबको था कि उनके पति का किसी अन्य महिला से अवैध संबंध है! लेकिन सभी लोग उनकी गलतियों को छुपाने के लिए कहते कि जब चोर को सेंध काटते पकड़ो तब उसे चोर कहो! लेकिन जब उन्होंने यह बात साबित कर दी कि उनके पति का किसी और के साथ नाजायज रिश्ता है! तब भी सभी लोग उनके पति के बचाव में ही लगे थे और कह रहे थे कि तुम्हें तुम्हारा खर्चा मिल ही जाता है तो तुम्हें दुनियादारी से क्या मतलब तुम अपने काम से काम रखो तुम्हारे पति कहां जाते हैं,क्या करते हैं इससे क्या लेना देना तुम्हारा! अगर तुम्हारी जरूरत ना पूरी हो तो शिकायत करो! 
पर ये राय देने वाले लोगों के साथ जब ऐसा कुछ होता तो क्या वे चुप रहते हैं? उन्हें बिल्कुल भी बुरा नहीं लगता चुपचाप सब कुछ सहते रहते?और अगर किसी औरत को सच में फर्क नहीं पड़ता कि उसका पति क्या करता है ,किस से उसका क्या संबंध है, उसे सिर्फ अपने खर्चे और पैसों से मतलब है तो ऐसी औरतें मतलबी होते हैं जिन्हें सिर्फ और सिर्फ पैसों से प्यार होता है और किसी चीज से कोई मतलब नहीं! कुछ दिन बाद जब उस महिला से अपने पति को छुड़ा पायीं! और सब कुछ नॉर्मल हो गया! लेकिन अब वो पहले जैसी नहीं रहीं, अब वो हर बात को नकारात्मक नजरिए से देखती थीं जिस वजह से उन्होंने कुछ लोगों का दिल भी दुखाया, जोकि गलत था! पर हमेशा इंसान गलत नहीं होता है हालात उसे गलत सोचने पर मजबूर कर देते हैं कुछ ऐसा ही उनके साथ हुआ वो अब हद से अधिक नकारात्मक हो चुकी थीं! जो सबको नजर आ रहा था पर उसके पीछे का कारण किसी को नजर नहीं आ रहा था! जिस बात से वह हमेशा डरती रहती थी, एक फोन मिलाने के लिए वो रातों में भटकती रहती थी दूसरों के घर बेधड़क पहुँच जाती थी यह जानने के लिए कि कहीं शराब के नशे में कोई अनहोनी तो नहीं हो गई? उनके पति सही सलामत है कि नहीं? और ऐसे ख्याल उन्हें हमेशा डराते रहते थे पर कोई उनके दर्द को कभी नहीं समझ सका! लोग बोलते की हमेशा बुरा ही सोचती हो कभी अच्छा भी सोच लिया करो! जिस बात से वो हमेशा डरती रहतीं थीं ,शायद नियति को भी वही करना था! सन 2015 दीपावली से 5-6 दिन पहले की बात है  3:00 से 4:00 के मध्य उनके पति उन्हें ढूढ़ते हुए खेत की ओर गए जहाँ वो शायद लहसुन लगा रही थी! बोले बाजार जा रहा हूंँ अभी थोड़ी देर में आ जाऊंगा! इस पर वो बोली ठीक है पर जल्दी आ जाना कोहरे पड़ने लगे हैं रात मत करना! तो उन्होंने कहा अरे यार! घर के बगल में ही दावत है देर क्यों करूंगा जल्दी आ जाऊंगा दावत पर भी तो जाना है! इतना कहकर वो वहां से चले गए और वो वहीं काम करती रहीं! रात करीब 7:00 बजे थे कि अचानक बाहर से चाचा जी चिल्लाते हुए आए और बोले चाबी दो.....कहाँ है बाइक की चाभी.......चाभी दो चाभी जल्दी... ! सभी लोग पूछने लगे हुआ क्या है? लड़खड़ाती हुई आवाज में बोले मास्टर भैया का एक्सीडेंट.........! यह बात सुनकर सब घबरा जरूर गए पर कोई ज्यादा डरा नहीं क्योंकि सब को लगा कि जैसे पहले कई बार एक्सीडेंट हुआ था तो हल्की-फुल्की चोट लगी थी वैसे ही......! लेकिन कुछ ही मिनट में सैकड़ों लोग इकट्ठा होने लगे और सब रोने चिल्लाने लगे! सभी लोग उनके बीवी और बच्चे को समझा रहे थे और दिलासा दे रहे थे! और उनका बड़ा बेटा(10)बोल रहा था पापा को बस थोड़ी सी चोट आई है पिछली बार की तरह! अभी ठीक हो कर आ जाएंगे ये कह कर वो अपनी मां को चुप कराने का प्रयास कर रहा था! पर उन पर किसी बात का कोई असर नहीं हो रहा था एक्सीडेंट की बात सुनकर वह कुछ देर के लिए अपनी आवाज ही खो बैठी थीं! कुछ ही देर बाद सभी को पता चल गया कि एक्सीडेंट इतना भयानक था कि...... .! पर सभी लोग उनसे और उनके बच्चे से छुपा रहे थे हर कोई छुप-छुपकर बस रो रहा था! बहुत ही भयावह रात थी जिसकी सुबह और भी अधिक डरावनी थी! अब वह अचेत अवस्था में जा चुकी थी सुबह होने के बाद भी उनकी आंखों के सामने बस अंधेरा ही छाया हुआ था,हजारों लोग थे लेकिन फिर भी वह अकेली थी!  जिसकी आवाज इतनी तेज थी कि अगर वह पूरी ताकत से बोल दे तो किसी के कान के पर्दे फट जाए पर आज वही चिल्ला कर रो नहीं पा रही थी अपनी आवाज खो चुकी थी वह एक ऐसी रात जिसका कभी सवेरा ना हुआ जिसका अंधेरा आज भी उनकी जिंदगी में भरा हुआ है! आज 6 साल बाद उनके बच्चों की स्थिति एक अनाथालय के बच्चों से भी बदतर हो गई है खाने पीने की तो कमी नहीं है परवरिश मैं बहुत ही कमियाँ हैं! बड़े बेटे ने तो सभ्यता संस्कार और अच्छे व्यवहार जैसी चीज खत्म होती जा रही है वह अपनी मां की थोड़ी सी भी इज्जत नहीं करता है! इसमें उसकी पूरी गलती नहीं है क्योंकि बचपन से वह अपनी माँ की बेज्जती देखता आया है और आस-पड़ोस के लोगों के मुंह से सिर्फ बुराइयाँ ही सुनता आया है! इसलिए उसे लगता है कि उसकी मां सच में बहुत बुरी है उनमें थोड़ी भी अच्छाई नहीं है!  लोगों ने जितना बुरा बना दिया था उतनी बुरी थी नही!और उसकी छोटी बहन की हालत इतनी दयनीय है कि जिसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है उसके साथ बच्चे खेलना तक नहीं चाहते छोटे से लेकर बड़े सभी विषय देखकर नाक मुंह सिकुड़ना लगते हैं उसका व्यवहार सामान्य बच्चों सा है ही नहीं ना तो उसमें बचपना है और ना ही समझदारी पर लोग उसकी मदद करने की बजाय उसकी बुराइयाँ करते हैं और घृणा करते हैं! और कुछ आंखे तरेर कर भगा देते हैं! ये वही लोग होते हैं जो नवरात्री में कन्या खाने के लिए उसे बड़े प्यार से बुलाते हैं! मैं आये दिन देखतीं हूँ लोग भगवान के नाम पर लाखों खर्च कर देते हैं पर मदद के नाम पर एक दूसरे का मुंह देखने लगतें हैं! एक बार जब कुछ लोगों के यह कहने पर कि महीने में कम से कम एक बार सत्यनारायण जी की कथा जरूर सुननी चाहिए और ब्राह्मणों को भोजन खिलाना चाहिए, जब मैंने ये कहा कि इससे अधिक पुण्य तो उनके बच्चों की सिर्फ पढ़ाई का ही खर्चा उठा लो तो मिलेगा! तो बोलते हैं यहां खुद के  बच्चों का खर्चा उठा पाना मुश्किल है और ये दूसरों के बच्चों का खर्च उठाने की बात कर रहीं हैं! 
मैं ये नहीं कहती कि कोई पूजा पाठ नहीं करें, पर पूजा पाठ के जरिए जो लोग अपने पैसों का प्रदर्शन करते हैं वे जरूरतमंदों की मदद कर के करते तो अधिक बेहतर होता! इससे पैसों का प्रदर्शन भी हो जाता और किसी की मदद भी! 

गुरुवार, 4 नवंबर 2021

नई राष्ट्रीय जल नीति

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा नई जल नीति बनाने के लिए 11 सदस्यों वाली एक ऐसी कमेटी का गठन किया गया है जिसके अध्यक्ष मिहिर शाह को बनाया गया है! इन 11 सदस्यों को लोगों के बीच जाकर जनता( बड़े-बड़े कॉलेज अनुसंधानों, संस्थाओं आदि से )जल आपूर्ति के बारे में और मुख्य कारण और समाधान के तरीकों पर राय लेनेपूछने का काम दिया गया !  इस मुहिम के जरिए अभी तक 124 सलाह प्राप्त हुई है! और मुख्य कारण सामने आए हैं! 
जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण बिंदु
कृषि में विविधता-भारत में 80-90% पीने का पानी खेती के काम करने में लाते हैं! यह बात जानकर आप सोच रहे होंगे कि अगर खेती नहीं करेंगे तो खाएंगे क्या? तो यह जानकर हैरानी होगी कि असल में उन क्षेत्रों में पीने के पानी को सिचाई के उपयोग में लिया जा रहा,जोकि भौगोलिक रूप से उस प्रकार की खेती के लिए नहीं बने हैं! जिसकी कर रहें हैं! जैसे हरियाणा, पंजाब यह वह क्षेत्र है जहां चावल की खेती अधिक होती है, पर असल में यह जलवायवीय रूप से चावल की खेती करने के लिए अनुकूल नहीं है! क्योंकि चावल की खेती वास्तविक रूप से उन क्षेत्रों में होती है जहां पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है! तो आप सोच रहे होंगे कि पंजाब हरियाणा में तो पानी की मात्रा बहुत ही है, फिर ऐसा क्यों कह रहे हैं! 
सबको पता है कि औसत जल वर्षा से पानी की मात्रा का पता लगाया जाता है इसलिए हमने जमीन से कितना पानी निकाला यह मायने नहीं रखता बल्कि यह मायने रखता है कि हमें बारिश से कितना पानी प्राप्त हुआ! इस हिसाब से पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल जो जलवायवीय रूप से चावल की खेती करने के लिए अनुकूल है! जबकि पंजाब और हरियाणा में नहरों और हरित क्रांति के दौरान अंडर ग्राउंड वाटर को निकालने के लिए बनाई गई तकनीक से चावल की खेती होती है! जिससे अंडर ग्राउंड वाटर में जबरदस्त कमी आई अर्थात यह क्षेत्र जलवायवीय रूप से चावल की खेती करने के अनुकूल नहीं है फिर भी चावल के सबसे अच्छे उत्पादक राज्यों में आता है!जिस पानी से खेती हो रही है उसका उपयोग पीने के पानी में करने की जरूरत है! तो सवाल उठता है कि पंजाब और हरियाणा वाले कृषि करना बंद कर दें? तो बता दे कि कृषि बंद करने की कोई जरूरत नहीं है बस कृषि में विविधता लाने की  जरूरत है अर्थात जो क्षेत्र भौगोलिक रूप से जिस खेती के लिए अनुकूल हैं उस क्षेत्र में उसी की खेती की जानी चाहिए जिससे पीने कि पानी की कमी ना हो! और सरकार को चाहिए कि 31 फसलों के अतिरिक्त अन्य फसलों पर पर भी एमएसपी(न्यूनतम समर्थन मूल्य) या फिर सब्सिडी दे! जिससे किसान बेझिझक उन फसलों की खेती करें! इससे पानी का सदुपयोग होगा और पीने के पानी की किल्लत खत्म होगी! 
• आपूर्ति-पक्ष उपाय- राजस्थान जैसे राज्यों जिनमें  पानी की कमी है और वहांं पानी नहरों से पहुंचाने के बजाय पाइप लाइन से पहुंचाया जाना चाहिए जाए! जिससेेे वाटर का वेपर कम बनेगा और पानी रिस रिस कर जमीन में कम जाएगा ! जिससे बिना बर्बाद हुए  वहां पहुंंच जाएगा जहाँ जरूरत है और खर्चा भी होगा! 
और भी बहुत से कारण और समाधान के उपाय बताये गये हैं जो बहुत लागू भी होने वाले हैं! 

शनिवार, 23 अक्तूबर 2021

एक लड़ाई उनके लिए जो हमारे लिए अपनी जान न्योछावर कर गए!

जब भी हमारे देश के रक्षक शहीद होते है ,तो आम जनता से लेकर राजनेता सब सभी श्रद्धांजलि अर्पित करके अपना दु:ख प्रकट करते हैं ,अगर इतना ही दु:ख होता है तो क्यों नहीं शहीदों के परिवार के लिए सुविधाओं सारी सुविधाए मुफ़्त कर देते ?क्यो नही उनके बच्चो की शिक्षा मुफ़्त कर देते? सरकारी और निजी हर स्कूल मे चाहे वो कितनी ही बड़ी क्यों न हो ! क्यों नहीं उनकी यात्रा को मुफ़्त कर देते? सरकरी वाहन से के साथ प्राइवेट वाहनो में भी! क्यों नही उनके लिए मुफ़्त इलाज़ की सुविधा सरकारी अस्पताल  के साथ प्राइवेट अस्पताल में भी कर देते? क्यो नही कोई ऐसा कार्ड शहीदों के परिवार के लिए बनाया जाता जिससे वे सरकारी और प्राईवेट हर जगह मुफ्त शिक्षा,इलाज और यात्रा प्राप्त कर सके?जो लोग सोशलमीडिया पर जाबांज सिपाहियों के शहीद होने पर दु:ख प्रकट करते हैं, वे लोग शहीदों के परिवार के लिए आवाज़ क्यों नही बुलंद करते? हमेशा श्रद्धांजलि और सहानुभूति तक ही सीमित क्यों रह जाते हैं? सिर्फ श्रद्धांजलि अर्पित करने और सहानुभूति प्रकट करने से उन लोगों का जीवन नहीं चलने वाला ! जो अपने घर के मुखिया को खो चुके हैं! इमोशनल सपोर्ट के साथ फाइनेंशियल सपोर्ट की भी जरूरत है! क्योंकि जिंदगी क्योंकि जिंदगी सिर्फ प्यार से नहीं चलती जिंदगी जीने के लिए भौतिक सुविधाओं  की सख्त जरूरत होती है! और सिर्फ मुआव़जे से काम नहीं चलेगा!कोई ऐसी योजना चलाने की जरूरत है, जिससे देश के लिए जान दे चुके शहीदों के परिवार की लाइफ सिक्योर हो सके। उनकी वे सभी जरूरतें पूरी हो सकें जिसकी उन्हें आवश्यकता है! पूरी जिंदगी के लिए ना सही पर कम से कम तब तक, जब तक  कि शहीद हुए जवानों के बच्चों की शादी नहीं हो जाती! और अपने पैर पर नहीं खड़े हो जाते ! हमारे लिए जब वे जान दे सकते हैं,तो क्या हमें और हमारी सरकार को उनके परिवार के लिए इतना भी नहीं करना चाहिए कि हमारा फर्ज नहीं बनता कि उनके परिवार की लाइफ को थोड़ा बेहतर और आसान बनाने का? हम उनके लिए कुछ ना सही पर आवाज तो उठा ही सकते हैं, जिस सोशल मीडिया पर हम शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके प्रति भी संवेदना व्यक्त करते हैं,उसी सोशल मीडिया पर उनके लिए आवाज उठा सकते हैं और सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार तो बना ही सकते हैं! 

अगर मेरी लेखनी से थोड़ा भी सुधार आता है तो यह मेरे लिए सबसे कीमती इनाम होगा और मेरे लिए सबसे खुशी की बात ! मेरा लिखना तभी वास्तव में सफल होगा! 
अगर मेरी बात वास्तव में सही लग रही है तो आप से इक छोटी सी बिनती है कि इसको अधिक से अधिक लोगों को साझा करें 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ये मैं अपने किसी फायदे के लिए नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ उन जाबांज वीरों के परिवार वालो के लिए कह रहीं हूँ, लेकिन हाँ, अगर सच में अच्छी है तो! 

रविवार, 17 अक्तूबर 2021

दांस्ता-ए- जिन्दगी

जब जिंदगी सपनों  से पहले 
पूरी होने वाली होती है, 
तब सपने नहीं, 
सिर्फ ख्वाहिशे 
पूरी करने की चाह रहे जाती है! 
जब जिंदगी पेड़ पर लगे 
उस सूखे पत्ते सी हो जाती है, 
जिसकी जिंदगी तो होती है 
पर जान नहीं होती! 
तब मौत आने से पहले 
जीजिविषा मर जाती है! 
जब जिंदगी गले लगाकर पीठ में 
खंजर घोपने की फिराक में होती है, 
तब लंबी जिंदगी कि नहीं 
सिर्फ क्षणिक आनंद महसूस 
करने की चाह रह जाती है! 
जब दर्द बाहों में बाहें डालकर 
हर वक्त साथ चल रहा हो, 
तब मौत से पहले जिजीविषा मर जाती है! 
जब मंजिल तक पहुंचने से पहले 
जिंदगी अपनी मंजिल को हासिल 
करने का ठान लेती है! 
तब मंजिल की नहीं, 
सिर्फ खूबसूरत सफर में 
खानाबदोश बनने की चाह रह जाती है! 
जब जिंदगी रेत सी 
हाथ से फिसल रही होती है! 
तब लंबी जिंदगी की नहीं, 
सिर्फ बड़ी जिंदगी की चाह रह जाती है! 
पता तो सबको है, 
कि जिंदगी की मंजिल मौत है ! 
फिर भी मौत के नाम से 
आंखें नम हो जाती हैं! 


ये कलम हर बार कमाल करती है!

जब आहत होती विश्व के क्रंदन से तब ये कलम,  कोरे कागज़ को रंगीन करती है!  जब जब होता है  अभिव्यक्ति की आज़ादी पर वार,  तब तब कलम ...