कहते हैं इस पूरे श्रृष्टि का निर्माण सर्वशक्तिमान ईश्वर ने किया है , तो हर इंसान का निर्माण भी उन्हीं ने किया है
तो जाहिर सी बात है मनुष्यों के अंदर होने वाली सारी गतिविधियां भी उन्हीं की देन है, तो फिर किसी की खतरनाक सोच और हैवानियत भी उनकी देन हैं. तो फिर कोई इंसान बुरा होता है तो हम उसे गलत क्यों कहते हैं? क्योंकि उसकी खतरनाक सोच भगवान की देन है.और भगवान की कोई चीज गलत नहीं हो सकती.
कहते हैं भगवान की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता तो फिर हत्या, हैवानियत, चोरी आदि भी उनकी मर्जी से होतें होगें? इससे उनका मनोरंजन होता होगा? तभी तो चुप चाप एक देखते रहते हैं, या फिर जिसे सब सर्वशक्तिशाली कहते हैं उसकी हकीकत कुछ और है?या तो वो सर्वशक्तिशाली नहीं है? या तो अति निर्दयी है?और जब कोई गलत काम करता है तो ये भी भगवान की मर्जी से होता है तो फिर दोषी को सजा सुुुना कर सुप्रीम कोर्ट भगवान के खिलाफ काम करती है. क्योंकि इंसान तो भगवान की कठपुतली है जो उनके इसरो पर नाचता रहता है. दोषी नेे उन्हीं के इसारे पर काम किया , तो फिर किसी की नजरों में वो गलत कैसे हो गया? कहते हैं भगवान के सारे काम सही होतें हैं तो दोषी भी सही और सुप्रीम कोर्ट भी.जब दोनों सही है तो फिर सजा क््यों? क्योंकि ये भगवान ने उससे करवाये हैं तो असली गुनेहगार तो भगवान है.और हाँ भगवान, अल्लाह और गॉड शक्तिशाली हैं तो फिर इन मंदिर और मस्जिदों की रखवाली ये मामुली इंसान क्यों करता है? क्या भगवान इतने आलसी हैं कि अपने घर की रक्षा खुद नही कर सकते?
उस समय भगवान , अल्लाह और गॉड कहाँ चले जाते हैं? जब कोई ढोगी उनके नाम से लोगों को लूट रहा होता है और उनके ही दरबार में किसी के जिस्म से अपनी प्यास बुझाता है. क्या इतने बेशर्म और निर्दयी होतें हैं भगवान? तो फिर इनकी पूजा क्यों करते हैं लोग?

कहाँ चले जाते हैं प्रेमियों के मार्गदर्शक सांवरिया कृष्ण उस वक्त जब कोई व्यक्ति प्यार के नाम पर किसी मासूम के जिस्म को अपना निसाना बना रहा होता है और अपने जिस्म की प्यास बुझा रहा होता है?कहते हैं इंद्र देव का मिज़ाज रंगीन था ! एक बार इंद्र धरती पर अपनी पत्नी इंद्राणी के साथ आये थे, और इंद्राणी को प्यास लगी वे इंद्राणी को वहीं बिठा कर एक गाँव में गए उंहें गाँव में एक खूबसूरत कन्या (उदंती ,जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ में उदंती- सीतानदी रिज़र्व के रूप में स्थित है) को देख कर उनका मन मचल जाता है और उस पर मोहित हो गए ! और उन्हें इंद्राणी का खयाल ही नहीं रहा! तो आप लोग बताइये कि क्या ऐसे चरित्रहीन व्यक्ति को पूजना चाहिए ?जिसे पतिधर्म का पालन करना भी नहीं आता है.

ये विचार भी उन्हीं की देेन है ?क्योंकि पूरे श्रृष्टि का निर्माण उन्हीं ने तो किया है.ईश्वर तो सर्वशक्तिशाली है तो फिर क्यों नहीं अपने शक्ति से इनके मन को स्वच्छ् कर देते? क्या इस लिए नहीं करते कि इससे उनका मनोरंजन
होता है? या तो भगवान अति कमजोर है या फिर भगवान सिर्फ भर्म है ?कहते हैं कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया गंगा जल को जिस जगह पर डाल देते हैं वो जगह पवित्र हो जाती है और अपवित्र इंसान को भी पवित्र करने की क्षमता रखता है तो फिर मासिक धर्म के वक्त महिला के छूने भर से ये अपवित्र कैसे हो जाते हैं?
क्या कोई आस्तिक है जो भगवान की पूजा निस्वार्थ भाव से करता है या भगवान को बिना किसी अपेक्षा के मानता है? सब भगवान को सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए मानते हैं और पूजा करते हैं अगर बिना अपेक्षा के करते हैं तो उसमें भी स्वार्थ छुपा होता है क्योंकि पूजा करने से खुशी और शांति मिलती है तो हुआ न स्वार्थ!
है कोई भगवान और अल्लाह, गॉड का सच्चा भक्त जो इन सवालों का उत्तर दे सकता है???????????????????????????????????
काश!मंदिरों में छप्पन भोग लगाने की बजाय, भूखे को भोजन खिलाने की पंरपरा होती !
तो मंदिर की चौखट पर भूखे बच्चे नज़र ना आते!
काश! पीर बाबा पर चद्दर चढ़ाने के बजाय
जरूरतमंद को वस्त्र भेट करने की पंरपरा होती,
तो ठंडी से ठिठुर कर किसी की मौत ना होती!
काश !भागवत-भंडारा कराने के बजाय गरीब बच्चों
के सपने पूरे कराने की पंरपरा होती तो किसी के सपनें जिंदा दफ़न नहीं होतें !
काश! मंदिर ,मस्जिद बनाने के बजाय बेघरों के सर पे छत देने की पंरपरा होती तो कोई बेघर ना होता!
काश !लोग धर्मवाद,जातिवाद करने के बजाय, मानवतावादी होतें,तो आज धर्म के नाम पर अधर्म नहीं हो रहें होते! - मनीषा गोस्वामी