जिस तरह से कर्नाटक में ही हिजाब पहनकर कक्षाओं में प्रवेश ना देने की वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में विवाद उपज रहा है। यह छात्राओं संकीर्ण सोच को दर्शा रहा है विद्यालय एक ऐसा स्थान जहां सभी को एक समान माना जाता है ना कोई हिंदू होता ना कोई मुस्लिम सभी सभी का एकमात्र धर्म होता है और वह होता है शिष्य धर्म।इसलिए सभी विद्यार्थियों को धर्म धर्म ,जाति से ऊपर छात्र धर्म को रखने की जरूरत है। जैसे डॉक्टर की नजर में एक मरीज का कोई धर्म जाति नहीं होता सिर्फ और सिर्फ मरीज होता है और मरीज की जान बचाना डॉक्टर का कर्तव्य होता है,
वैसे ही एक शिक्षक की नजर में विद्यार्थियों का कोई धर्म और जाति नहीं होता है सभी एक समान होते हैं जिन्हें शिक्षा देना अध्यापक का मुख्य कर्तव्य होता है और वह अपने कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन करने की कोशिश करता है ठीक उसी तरह छात्र-छात्राओं को भी चाहिए कि वह धर्म जाति या वर्ग से हटकर विद्यार्थी होने के कर्तव्य का पालन पूरी निष्ठा से करें और उनके मन में ऐसे भाव होने चाहिए कि उन्हें शिक्षण संस्थाओं में एक विद्यार्थी के रूप में पहचाना जाना चाहिए ना कि किसी धर्म या जाति के रूप में। साथ ही हमारा देश विविधता में एकता ही हमारी विशेषता के लिए दुनिया में जाना जाता है। इसलिए इस विशेषता को बनाए रखने की जरूरत है। देश की एकता को बनाए रखने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो इससे हमारे देश की छवि पर बहुत ही बुरा असर पड़ेगा वैसे भी दुनिया के तमाम देश निगाह गड़ाए बैठे रहते हैं हमारे देश पर और ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं कि कब ऐसा मौका मिले जिससे हमारे देश की छवि दुनिया के सामने खराब कर सकें। जिस तरह कुछ उग्र धार्मिक संगठन और राजनीतिक पार्टियां अपनी रोटी सेकने के चक्कर में विद्यार्थियों का इस्तेमाल करके आग में घी डालने का काम कर रही है और दुर्भाग्यपूर्ण है कि विद्यार्थी आसानी से उनके जाल में फंस रहें हैं और अशोभनीय हरकत कर रहें हैं।
ऐसे में विद्यार्थी अपने पैर पर तो कुल्हाड़ी मार ही रहे हैं पर देश की शांति व्यवस्था को भी भंग कर रहे हैं सभी विद्यार्थियों को अपने तर्क शक्ति का इस्तेमाल करने की जरूरत है ना की किसी के हाथ की कठपुतली बनकर उनके इशारे पर नाचते रहने की,क्योंकि इससे उनका ही नुकसान होगा।भविष्य में ऐसी कोई भी हरकत करने से बचने की सख्त जरूरत है जिससे हमारी एकता में फूट डाला जा सके और विविधता में एकता यही हमारी विशेषता यह एक स्लोगन मात्र बन कर रह जाए। हाई कोर्ट का आखिरी निर्णय आने तक सभी को शान्ति व्यवस्था कायम रखने की जरूरत है और शांति पूर्वक शैक्षिक संस्थाओं के नियमों का पालन करने की जरूरत है।युव हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है और इस ताकत का सही से उपयोग करने की जरूरत है।

