मंगलवार, 7 सितंबर 2021

कुछ पल अपनों के लिए!


हर साल 10 सितंबर को आत्महत्या रोकथाम दिवस के रूप में मनाया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य है कि विश्व में तेजी से बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके! डब्ल्यूएचओ के अनुसार हर 4 मिनट में एक व्यक्ति की मौत आत्महत्या से होती है ! डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक 89 परसेंट लोग आत्महत्या करने से पहले कुछ ना कुछ संकेत जरूर देते हैं !और यह बात सच भी है! लेकिन अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं यह सोच कर कि यह तो हमेशा बस अपना दुखड़ा सुनाता रहता है ! और हर छोटी समस्या को बड़ा मान लेता है! और जब वही व्यक्ति कोई गलत कदम उठा लेता है तो हम कहते हैं कि अगर कोई समस्या थी तो हमसे साझा करना चाहिए था! लेकिन जब वही व्यक्ति जीवित होता है तब हम उसकी थोड़ी सी भी परवाह नहीं करते! 
जब किसी को हमारे इसने और अपनेपन की जरूरत होती है तब हम अक्सर व्यस्त होते हैं क्या वक्त काम इंसान की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है? एक शोध के अनुसार 19 मार्च 2020 से 2 मई तक 338 लोगों ने आत्महत्या की वजह अकेलेपन था! जब कोई व्यक्ति हमसे कहता है कि हमें अकेला छोड़ दो तो हम उसे अकेला छोड़ देते हैं यह सोच कर की उसे शांति और सुकून की जरूरत है शायद इसलिए सब से दूर रहना चाहता है! जबकि सच तो यह है की असली शांति और सुकून अपनों के साथ अपनों के बीच मिलती है अपनों के प्यार से अपनों के अपनेपन मिलती है ना कि अकेले रहने से! कोई व्यक्ति कितना ही मजबूत क्यों ना हो पर एक वक्त ऐसा जरूर आता है !जब वह चाहता है कि कोई उसकी ताकत बने! जो उसके अच्छे और बुरे समय में उसके साथ खड़ा हो लेकिन तब वह खुद को अकेला पाता है! जब उसे जरूरत होती है! किसी की प्यार भरी झप्पी की तब वह अकेले में रो रहा होता है! हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि कभी किसी पर ध्यान ही नहीं देते कभी किसी के दर्द को समझना ही नहीं चाहते महीनों तक अपनों की खबर तक नहीं लेते एक वक्त था जब महीनों चिट्ठी के जवाब का इंतजार बेसब्री से करते थे लेकिन आज जब एक सेकंड में किसी के आमने सामने हो सकते हैं तो किसी के पास वक्त ही नहीं कोई कितना भी व्यस्त क्यों ना हो पर हफ्ते में एक बार एक दो लोगों से बात तो कर ही सकता है उसकी खैरियत पूछी सकता है इससे सिर्फ उस व्यक्ति का ही नहीं बल्कि हमें भी खुशी मिलेगी कुछ लोगों को लगता है कि दूसरों को वक्त देना समय की बर्बादी है ! किंतु मुझे नहीं लगता कि अगर हमारे थोड़े से वक्त की वजह से किसी के लबों पर मुस्कान आ जाए किसी के मन का बोझ उतर जाए तो उसमें समय की बर्बादी है! आत्म हत्या को रोकने के लिए हम सबको मिलकर काम करना ही होगा !एक दूसरे का सहारा बनना ही होगा! एक आंकड़े के मुताबिक आत्महत्या करने वालों में 81% युवा होते हैं  जिनकी उम्र 15 से 29 के बीच की होती है जिनमें अधिकतर छात्र होते हैं!  इन के आत्महत्या की वजह परीक्षा में कम अंक और सिलेक्शन ना होने की है! और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह लोग पढ़ाई के वक्त हर किसी से रिश्ते तोड़ देते हैं दोस्त से दूरी बना लेते हैं रिश्तेदारों से दूरी बना लेते हैं किसी भी समारोह में नहीं जाते एक तरह से कहा जाए तो जिंदगी को जीना ही भूल जाते हैं सिर्फ बस एक ही लक्ष्य रहता है और वह रहता है नौकरी पाना या फिर अच्छे अंक लाना! नौकरी और अच्छे नंबर लाने की इच्छा है इनके ऊपर इतनी हावी हो जाती है की इनके अंदर की मानवीय संवेदना को मार देती है कोई व्यक्ति कितना परेशान है उस व्यक्ति को इनकी कितनी जरूरत है इससे उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ता और जब इस सब के बावजूद सफलता इनके हाथ नहीं लगती तो इनकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है कोई व्यक्ति ऐसा नजर नहीं आता जिससे यह अपनी मन की बात कर सके और इन्हें सभी के तारों का डर सताने लगता है और फिर गलत कदम उठा लेते हैं यह भूल जाते हैं कि जितनी खुशी अपने पल प्यार इसमें से मिलती है उतनी खुशी सफलता से नहीं मिलती सफलता की खुशी तो बस छोटी होती है और प्रेम और स्नेह की खुशी हमेशा के लिए होती है जो यादें बनने के बाद भी लबों पर मुस्कान ला देती है! मैं जितनी भी क्लास करती हूं वहां के सभी शिक्षक अधिकतर यही कहते हैं कि अगर सफलता प्राप्त करनी है तो सभी से दूरियां बना लो दोस्तों के साथ बाहर मत जाओ किसी की शादी में मत जाओ किसी की बर्थडे पार्टी में मत जाओ बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो एक तरह से कहा जाए तो जिंदगी को जीना छोड़ कर सिर्फ नौकरी के लिए जिओ ! और ऐसे में अधिकतर छात्र अवसाद ग्रसत हो जाते हैं! सफलता और असफलता के बीच इतना उलझ जाते हैं कि जिंदगी जीना ही भूल जाते हैं! आत्म हत्या को रोकने के लिए हम सबको एक साथ काम करना होगा! हर किसी अपने को अपनेपन का एहसास कराना होगा !उसे एहसास कराना होगा कि वह अकेला नहीं है हम उसके साथ हैं! 

24 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन महत्वपूर्ण है, मन की प्रतिकूलता उस पर हावी न होने पाये। प्रेरक लेखन।

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  2. मनीषा,सही कहा तुमने की यदि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति को किसी का सहारा मिल जाए तो उसकी जिंदगी बच सकती है। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।
    इस विषय पर मेरी पोस्ट https://www.jyotidehliwal.com/2021/04/suicide-mera-koi-nahi-hai-islie.html
    जरूर पढ़ना।

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  3. आत्महत्या कि सबसे बड़ी वजह आज बेरोजगारी है। शिक्षित बेरोजगारी का इसमें ऊंचा स्थान है । इन्सान जब ठोस जमीन तलाशते तलाशते थक जाता है हर जगह निराश होकर आत्महत्या जैसी कुरुर विकल्प कि ओर अग्रशर होता है उसे लगता है कि सारी सम्स्याओं का समाधान वस यही है।
    हाँ वो खुश नहीं होता पर संतुष्ठ जरूर होता होगा।

    यह विषय कुछ कुछ अपना सा लगता है |
    विचारणीय विषय !

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    1. हां सर आप बिल्कुल सही कह रहे हैं बेरोजगारी के कारण बहुत से शिक्षित युवा आत्महत्या कर लेते हैं !लेकिन आत्महत्या करना समस्या का हल नहीं है!अपने हक की लड़ाई लड़ना चाहिए!
      प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद सर!

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  4. अब तो मोबाइल भी एक बहुत कारण बनता जा रहा है। आजकल के बच्चों में धैर्य बहुत कम है, जरा परिवार वालों ने मोबाइल पर दिन-रात चिपके रहने से टोका नहीं कि बुरा मान लिए और कर ली अपनी मर्जी, लटक गए

    विचारणीय व चिंतनीय प्रस्तुति

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    1. हां मैम सही कहा आपने छोटी सी बात को दिल पर ले लेते हैं!और गलत काम उठा लेते हैं!बच्चे आजकल तो मोबाइल के कारण बच्चे अपने भाई-बहन दोस्तों के साथ खेलना बातें करना सब बंद कर चुके हैं!हमेशा फोन में चिपके रहते हो और कोई कह दे तो दिल पर ले लेते हैं! उन्हें लगता है उनका असली दोस्त फोन है और घरवाले दुश्मन पर ऐसा नहीं है मैंने देखा कुछ लोगों को जो अपने भाइयों से एक-दो दिन बीट जाता है बात ही नहीं करते पर फोन पर अजनबी और अन्य लोगों से बातें करते रहते हैं! प्रतिक्रिया देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय मैम🙏

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  5. "मैं जितनी भी क्लास करती हूं वहां के सभी शिक्षक अधिकतर यही कहते हैं कि अगर सफलता प्राप्त करनी है तो सभी से दूरियां बना लो दोस्तों के साथ बाहर मत जाओ किसी की शादी में मत जाओ किसी की बर्थडे पार्टी में मत जाओ बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो एक तरह से कहा जाए तो जिंदगी को जीना छोड़ कर सिर्फ नौकरी के लिए जिओ ! "
    जिंदगी के यथार्थ को उजागर करती आपके लेख.. यह सच्चाई है कि भौतिक सफलता के लिए हम सभी रिश्ते तोड़ देते है जो गलत है.

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  6. महत्वपूर्ण विषय पर प्रभावी लेखन ।

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  7. आपका बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सर 🙏🙏आपने उस बिंदु पर गौर किया जो आज कि युवा पीढ़ी को अवसाद में ले जाने का सबसे बड़ी भुमिका निभाती है! जिसका परिणाम आत्महत्या जैसी घटनाएँ होती है!

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  8. आंकड़े डरावने हैं । आज के युवाओं में यह प्रवृत्ति बढ़ रही है ।।

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    1. हां मैम आंकड़े तक डरावने वाले हैं ही!
      🙏🙏

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  9. एक जरूरी विषय पर चिंतन किया है आपने।

    ज़िंदगी में फोकस और समय का उचित इस्तेमाल सफलता के लिए वांछनीय है पर उस समय में से कुछ समय हमें अपने, मित्रों और नाते रिश्तेदारों के लिए सुनिश्चित रखना चाहिए क्योंकि उन्हीं से हमें भावनात्मक संबल मिलता है। बिना इस संबल की नियमिल खुराक के लक्ष्य पर एकाग्रचित्त रह पाना बेहद कठिन है।

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    1. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सर 🙏🙏🙏 मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है!

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  10. अपनों की क़ीमत सपनों से ज़्यादा होती है। आपके विचार सही हैं और इन्हें समझा जाना चाहिए। मरने वाले अकसर इसीलिए अपनी जान दे देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कोई उनका अपना नहीं है, कोई उन्हें समझने वाला नहीं है।

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    1. हां सर यह बात सब को समझने की जरूरत है! सपनों के बिना तो हम खुश रह सकते हैं,पर अपनों के बिना खुश रहना नामुमकिन है!
      धन्यवाद आदरणीय सर🙏🙏🙏

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