गुरुवार, 20 मई 2021

कम्पल्सरी लाइसेंस से जल्द ही आसानी से मिलेगी वैक्सीन

 

18 मई को स्वदेशी जागरण मंच पर नितिन गडकरी ने कहा कि भारत सरकार को  वैक्सीन बनाने का अधिकार एक ही कम्पनी को ना दे कर कम से कम 10 अन्य कम्पनियों में दे देना चाहिए जिससे  अधिक दवा का निर्माण हो सके और आसानी से दवा पर्ति की जा सके! इस बयान के आते ही कई सवाल उठाने लगे! उनमें से कुछ के सवाल थे कि ये तो कम्पनी के साथ गलत होगा! 

अब सवाल उठता है कि क्या सरकार किसी कम्पनी पर दबाव बना सकती है कि वह अपने द्वारा खुद से बनाए गए फॉर्मूला किसी अन्य के साथ साझा करे? 

पेटेंट लॉ 1970 के तहत  यदि कोई कम्पनी किसी नए प्रोडक्ट  की खोज खुद की है  तो आपको 20 साल के लिए पेटेंट दिया जाएगा! इस लॉ के तहत ऐसा कोई भी कार्य भारत सरकार आपको करने की इजाज़त देती है जिसके तहत आप अपने प्रोडक्ट और प्रोपर्टी को सिर्फ आप ही बेच सकते हैं! लेकिन पेटेंट  ऐक्ट 2005 के तहत यदि आप किसी पूराने प्रोडक्ट के फॉर्मूले में कुछ बदलाव ला कर फिर से 20 साल  के लिए पेटेंट चाहते हैं तो आपको पेटेंट नहीं दिया जाएगा! 

लेकिन कम्पल्सरी लाइसेंस  जो की ( 𝗧𝗥𝗜𝗣𝗥 𝗧𝗿𝗮𝗱𝗲 𝗥𝗲𝗹𝗮𝘁𝗲𝗱 𝗜𝗻𝘁𝗲𝗹𝗹𝗲𝗰𝘁𝘂𝗮𝗹 𝗣𝗿𝗼𝗽𝗲𝗿𝘁𝘆 𝗥𝗶𝗴𝗵𝘁𝘀) द्वारा लाया गया था के तहत यदि कोई कम्पनी किसी ऐसे प्रोडक्ट की सप्लाई पूरी नहीं कर पा रही जिस पर उसे पेटेंट मिला है और मॉर्केट में उस प्रोडक्ट की बहुत अधिक माँग है तो ऐसे में सरकार उस कम्पनी पर एक्शन लेते हुए उस प्रोडक्ट को बनाने का फॉर्मूला अन्य कम्पनियों को दे सकती बशर्ते कि जिन्हें भी फॉर्मूला दिया जाएगा उन्हें अपनी कमाई का 10% उस कम्पनी को देना पड़ेगा जिसका प्रोडक्ट है! इस लिए भारत सरकार भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट के वैक्सीन का फॉर्मूला अन्य कम्पनियों को देगी जिससे दवा पूर्ति आसानी से हो पाएगी ! इस लिए अब जल्द ही हर एक को आसानी से वैक्सीन लग जाएगी! भारत सरकार का ये एक अच्छा कदम होगा! जिसका हमे विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि कम्पनी के फायदे से ज्यादा लोगों की जान बचाना जरूरी है🙏🙏🙏


20 टिप्‍पणियां:

  1. "कंपनी से फायदे से ज्यादा लोगो की जान बचाना जरूरी" सहमत हु इस बात से। बाकी वैक्सीन बनाना है हलवा बनाने का काम नही है...

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    1. आप सही कह रहें हैं कि वैक्सीन बनाना हलवा बनाने जैसा नहीं है पर जिन कम्पनियों को फॉर्मूला देने की बात की जा रहीं हैं वे वैक्सीन बनाने योग्य है जो आसानी से वैक्सीन का निर्माण कर सकती है
      अपनी राय राय रखने के लिए धन्यवाद सर🙏🙏🙏🙏

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  2. समय की मांग तो यही है कि ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन का उत्पादन हो।

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    1. हाँ सर बिल्कुल समय की मांग इस समय ज्यादा मायने रखती हैं जिसमें लाभ और हानि के चक्कर में समय व्यर्थ नही करना चाहिए!

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  3. Yes! present time me sabse jyada important hai vaccine ki poorti . Jisase logo ki jaan bach sake.
    Formula ko kayi company me batane ka nirday sahi bhi hai aur kanooni taur par bhi theek hai. Aise cheejo ka virodh karna bilkul bhi sahi nahi hai

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  4. अब सवाल उठता है कि क्या सरकार किसी कम्पनी पर दबाव बना सकती है कि वह अपने द्वारा खुद से बनाए गए फॉर्मूला किसी अन्य के साथ साझा करे? प्रमुख सवाल...गहन है। आपने अच्छा लिखा है।

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  5. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा गुरुवार (20-05-2021 ) को 'लड़ते-लड़ते कभी न थकेगी दुनिया' (चर्चा अंक 4071) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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  6. अच्छा लेख है प्रिय मनीषा |उझे इन बातों की जानकारी नहीं थी , बहुत ज्ञानवर्धन हुआ यूँ तो किसी का फार्मूला अन्य किसी के साथ साझा करने का कोई औचित्य नहीं पर देश हित में शायद कुछ लीक से हटकर फैसले लेने पड़ते हैं | हो सकता है कम्पनी इसमें खु सहयोग का सुझाव दे |

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    1. हाँ मैम, देश और जनता के हित के लिए कुछ नियमों में बदलाव और कुछ हट कर फैसले लेने सही है क्योंकि कि इस समय सबसे ज्यादा जरूरी है लोगों की जान बचाना! सायद ये फैसले लेने की नौबत ही ना आती हमारी सरकार को यदि अमेरिका , इजराइल की तरह हमारे यहाँ भी वैक्सीन पहले पूरे देश वासियों को लगवा देने के बाद दूसरे देश के लिए भेजती पर अब जब गलती हो चुकी है तो उसकी भरपाई किसी को तो करनी ही होगी!
      🙏🙏🙏धन्यवाद मैम🙏🙏🙏🙏

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  7. सराहनीय लेख। इस पर हम सब को विचार करके जल्द से जल्द अपना मत देना चाहिए। यह समय की माँग है।

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